
जोधपुर. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स में आयोजित दो दिवसीय कॉर्डियोलॉजी अपडेट-2020 वर्कशॉप का रविवार को समापन था। इस दौरान दिल्ली से आए विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. राहुल महरोत्रा ने डेलीगेट्स को इको कॉर्डियोग्राफी की 3डी टैक्निक से बीमारियों की पहचान करने के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि हार्ट के बढ़ते पेशेंट के बीच रोग की पहचान करने को लेकर उच्च कोटी के संसाधन होना आवश्यक हो जाता है।
ऐसे में वर्तमान में यह सबसे लैटेस्ट तकनीक है। जिसमें पूरी सटीकता के साथ रोग की पहचान की जा सकती है। साथ ही हार्ट पेशेंट की जांच के दौरान शरीर के दायें व बाएं हिस्सों में किस प्रकार से जांच करे इसके बारे में भी बताया। इस दौरान डेलीगेट्स को लाइव डेमो भी बताया गया।
कम संसाधनों में इस तरह से करें जांच कार्यशाला में खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य करने वाले डेलीगेट्स को प्रशिक्षण देते हुए उन्होंने कहा कि संसाधनों के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों या छोटे अस्पतालों में एडवांस तकनीक नहीं होती है। ऐसे में उन्होंने 2डी इको कॉर्डियोग्राफी से भी किस प्रकार सटीकता से पेशेंट की जांच करे। इसके बारे में विस्तार से बताया।
आयोजन सचिव डॉ. सुरेंद्र देवड़ा, डॉ. राहुल चौधरी, डॉ. अतुल कौशिक, एम्स ऋषिकेश के डॉ. वरूण कुमार एवं एम्स रायपुर के डॉ. सत्यजीत ने भी डेलीगेट्स को हार्ट से संबंधित बीमारियों के मरीजों की जांच करने, बीमारी की पहचान करने को लेकर व्याख्यान दिया। साथ ही डेलीगेट्स के सवालों के जवाब भी दिए।