जोधपुर

यूथ का गुस्सा सडक़ों से लेकर ‘हैशटैग’ तक

- जहां सरकार और प्रशासन नहीं जागते वहां जनता सोशल मीडिया के जरिये खड़ा कर देती है मुहिम - सोशल मीडिया पर अभियान कई मायनों में महत्वपूर्ण
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Dec 03, 2019
यूथ का गुस्सा सडक़ों से लेकर ‘हैशटैग’ तक
यूथ का गुस्सा सडक़ों से लेकर ‘हैशटैग’ तक

जोधपुर.
ऐसी घटनाएं जिससे पूरा देश हिल जाता है। जब लोगों की आंखों में गुस्सा होता है तो उसे जाहिर करने का एक तरीका सोशल मीडिया भी है। कई लोग सडक़ पर अपना आक्रोश जताते हैं तो कई हैशटैग का सहारा लेते हैं। जब सरकार और प्रशासन में कोई सुनवाई नहींं होती है तो यही सोशल मीडिया अभियान एक जन आंदोलन बन जाता है। निर्भया केस के बाद अब प्रियंका रेड्डी के मामले में भी ऐसा ही हुआ।

ट्वीटर हो या इंस्टग्राम यहां हैशटेग का काफी रोल है। फेसबुक और वाट्सएप के जरिये ऐसी मुहिम को बल मिलता है। जस्टिक फोर प्रियंका रेडडी हैशटेग को ऐसे ही लोकप्रियता मिली और वह ट्रेडिंग में आ गया। यही जन आंदोलन भी बना। भारत ही नहीं पूरे विश्व में इसको लेकर बात होने लगी। हालही में हुए इस प्रकरण को लेकर कई सेलिब्रिटी भी सोशल मीडिया कैम्पेन में जुड़े। इसका असर हुआ है कि प्रशासन को भी दबाव में आकर कार्रवाई करनी पड़ी।

सोशल मीडिया पर ऐसे उतरा गुस्सा
- जिस दिन घटना हुई इसके दो दिन बाद तक भारत में टॉप-20 में से 8 हैशटेग इसी घटना को लेकर टे्रंड में थे।

- 40 से ज्यादा हैशटेग से प्रियंका रेड्डी प्रकरण को लेकर रोष जताया गया।
- 30 से ज्यादा हैशटेग से इंस्टाग्राम पर पोस्ट भी हुई।

कई संगठन सडक़ों पर उतरे

अपना आक्रोश दिखाने के लिए कई यूथ बेस्ड संगठन सडक़ों पर भी उतर चुके हैं। इन संगठनों की ओर कैंडल मार्च से लेकर रैलियां तक निकाली है। यूथ अपनी बात रखना सीख रहा है।
जया बच्चन का समर्थन

सोशल मीडिया पर जया बच्चन का एक बयान भी काफी वायरल हुआ। संसद में उन्होंने दुष्कर्मियों को भीड़ के हवाले करने जैसी बात कही तो युवाओं ने इतना ट्वीट किया कि उनको कुछ ही घंटों में ट्रेंड में ला दिया। 7 से हजार से ज्यादा टवीट कुछ ही घंटे में हो चुके थे।

यहां जोधपुर में महिलाओं की टीम कर रही काम

जोधपुर में टोल फ्री निर्भया हैल्पलाइन भी महिला ट्रस्ट की ओर से संचालित की जा रही है। 1800120020 इस टोल फ्री नम्बर को यही ट्रस्ट संचालित कर रहा है। इस हैल्पलाइन का काम देखने वाली श्रीमती श्यामा तंवर ने बताया कि जोधपुर और आस-पास की कई महिलाएं इस पर फोन कर मदद मांगती है। उनकी आवाज को प्रशासन तक पहुंचाते हैं। कई बार काउंसलिंग भी करते हैं। इस हैल्पलाइन को शुरू करने वाले संभली ट्रस्ट के गोविंद राठौड़ ने बताया कि पिछले 6 साल से ज्यादा समय से इसे संचालित कर रहे हैं। इसका काम भी पूरी तरह से महिलाएं ही देखती है।

Updated on:
03 Dec 2019 03:53 pm
Published on:
03 Dec 2019 03:53 pm