
जोधपुर. आधुनिक मारवाड़ के निर्माता व जोधपुर के महाराजा उम्मेदसिंह के शासनकाल में सबसे महत्वपूर्ण कार्य उड्डयन विभाग की स्थापना करना रहा था। महाराजा उम्मेदसिंह स्वयं एक उत्तम विमान चालक थे । उनकी विमान सेवाओं तथा उनके विस्तार व विकास से प्रभावित होकर ब्रिटिश सरकार ने 23 जून 1931 को उन्हें वायुसेना में एयर कमोडोर तथा 1945-46 में एयर वाइस मार्शल का पद प्रदान किया । इन पदों को प्राप्त कर उन्होंने मारवाड़ के नाम को ही नहीं अपितु पूरे राजपूताने के नाम को सुशोभित किया । जोधपुर महाराजा के स्वयं के उपयोग के लिए तीन निजी हवाई जहाज थे उनमें मोनो स्पाट एसटी -4 ( वीटी - एजीबी ) , क्रोम्पर स्वीट ( वीटी- एकेवाई ) और परसीवलगल- ( वीटी - एजीकी ) शामिल थे । वर्ष 1936 में अजमेर के व्यवसायी राय बहादुर सेठ भागचन्द सोनी ने जोधपुर महाराजा को राज्य के उपयोग के लिए एक हवाई जहाज लियोपार्ड मोथ - वीटी - एएचएच भेंट किया था । वर्ष 1945-46 में जोधपुर एरोड्रम के अतिरिक्त दस 'सिविल लेण्डिग ग्राउन्डस पाली , सोजत , फालना , जालोर , सांचोर , नागौर , मेड़ता रोड़ , तिलवाड़ा , गडरारोड़ और उत्तरलाई में थे।