जोधपुर

महाशिवरात्रि विशेष : मंडोर किले के इस एक हजार वर्ष प्राचीन शिवालय को है जीर्णोद्धार का इंतजार, मामला ठंडे बस्ते में

देवादिदेव महादेव को खुद अपने ही मंदिर के जीर्णोद्धार का इंतजार है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अफ सरों ने करीब दो दशक पूर्व मंडोर में 10वीं-12वीं सदी का प्राचीन ब्रह्म व शिव मंदिर ढूंढ़ निकाला था।
2 min read
ancient mahadev shiv temple at mandore is in poor condition
महाशिवरात्रि विशेष : मंडोर किले के इस एक हजार वर्ष प्राचीन शिवालय को है जीर्णोद्धार का इंतजार, मामला ठंडे बस्ते में

नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर. देवादिदेव महादेव को खुद अपने ही मंदिर के जीर्णोद्धार का इंतजार है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अफ सरों ने करीब दो दशक पूर्व मंडोर में 10वीं-12वीं सदी का प्राचीन ब्रह्म व शिव मंदिर ढूंढ़ निकाला था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से 2004 और 2006 में आंशिक रूप से मंदिर के लिए बजट भी स्वीकृत हुआ था पर काम पूरा नहीं हो सका। अप्रेल 2014 में विभाग की प्रदेश इकाई के दो सर्किल जयपुर और जोधपुर बना देने के बाद भी इस दिशा में कोई काम नहीं हो पाया है। मंदिर को रिस्टोर करने और संरक्षित करने के लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू की गई लेकिन अधिकारियों के तबादले के कारण मामला ठंडे बस्ते में है।

सिर्फ गर्भगृह का हिस्सा ही बचा
मंडोर उद्यान के ऊपर प्राचीन दुर्ग के अवशेष है। यहां एक गर्भगृह सहित प्राचीन शिव और ब्रह्म के मंदिर भी है। कई जगह से इसके पत्थर भी गायब है। मुश्किल से गर्भगृह का कुछ हिस्सा बचा हुआ है। नियमित देखरेख के अभाव में मंदिर दिनों दिन क्षतिग्रस्त हो रहा है।

मंदिर का मूल स्वरूप आज भी बरकरार
इतिहाविदों के अनुसार मंडोर किले में खुदाई के दौरान निकला शिव मंदिर करीब 10वीं से 12वीं सदी का हो सकता है। सैंकड़ों वर्ष पुराने मंदिर में सार-संभाल नहीं होने से अधिकांश हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है लेकिन मंदिर का मूल स्वरूप आज भी बरकरार है। मंदिर की दीवार पूरी हट चुकी है और आसपास के कई प्राचीन और कलाकृति वाले पत्थर गायब है। पुरातत्व विभाग ने अब इसकी सुध लेना ही बंद कर दिया है। मंडोर किले में कोई स्टाफ तैनात नहीं होने के कारण समूचा परिसर शाम होते ही नशेडिय़ों और जुआरियों का अड्डा बन जाता है। क्षेत्रवासी कई बार इसकी शिकायत मंडोर पुलिस थाने में कर चुके है।

मंदिर जीर्णोद्धार के लिए फिलहाल कोई बजट नहीं
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के लिए वित्तिय वर्ष में केन्द्र से बजट जारी होता है लेकिन केवल मंदिर जीर्णोद्धार के लिए नहीं बल्कि पूरे मंडोर किले के जीर्णोद्वार के लिए होता है। मंडोर किले के रख-रखाव के लिए मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट की ओर से गोद देने प्रस्ताव भेजा गया है। फिलहाल मंदिर व किले के लिए कोई बजट स्वीकृत नहीं है।
- वि_ल बडिग़ेर, अधीक्षण, पुरातत्वविद्, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, जोधपुर सर्किल

Published on:
20 Feb 2020 11:07 am