
जोधपुर. पाकिस्तान से आ रही तेज धूल भरी हवाओं के कारण जैसलमेर बॉर्डर पर विशालकाय बालू के टीले एक बार फिर से अपने स्थान बदलने लग गए हैं। तेज अंधड़ में कई बार सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की तारबंदी तो कई बार बीएसएफ चौकियों के मार्का तक गायब हो जाते हैं। तेज हवाएं तारबंदी को भी क्षतिग्रस्त कर रही हैं। सीमा पार से घुसपैठ और मादक पदार्थों की तस्करी के खतरे को देखते हुए बीएसएफ ने केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) से सहायता मांगी है। काजरी ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर टिब्बा स्थिरीकरण की विशेष तकनीक तैयार करके बीएसएफ को दे दी है। उधर बार-बार क्षतिग्रस्त हो रही तारबंदी के लिए केंद्रीय सार्वजनिक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) की ओर से दोहरी तारबंदी का प्रस्ताव दिया गया है ताकि 80 से 100 किलोमीटर प्रति घण्टे की रफ्तार से आने वाले अंधड़ का मुकाबला किया जा सके। बीएसएफ ने इन दोनों उपायों को केंद्रीय गृह मंत्रालय की अनुमति के बाद शीघ्र ही लागू करेगा।
मूरठ घास और झाडिय़ां लगेगी
बीएसएफ को बॉर्डर पर बड़े पेड़-पौधे नहीं चाहिए। ग्रीनरी में दूर की वस्तुएं साफ दिखाई नहीं देती है। ऐसे में काजरी ने मूरठ घास सहित अन्य झाडिय़ां लगाने की तकनीक विकसित की है, जिनकी जड़ें बहुत गहरी होती है और कम पानी में रह जाती है। इनकी ऊंचाई भी 2 से 3 फीट तक ही होगी ताकि तश्कर व घुसपैठिएं इनकी आड़ में अंदर प्रवेश नहीं कर सके।
शाहगढ़ बल्ज सहित कुछ क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त हो जाती है तारबंदी
मार्च से लेकर जून तक पाकिस्तान से तेज धूल भरी हवाएं, अंधड़ और आंधी आती है। इसकी गति औसतन 80 किमी/घण्टा होती है। बालू के कण ढीले बंधे होने के कारण तेज हवा में उडकऱ तारबंदी को गायब कर देते हैं। कई बार तारबंदी क्षतिग्रस्त हो जाती है। शाहगढ़ बल्ज और इसके आसपास के क्षेत्रों में यह अधिक देखने को मिलता है। तारबंदी पर कुछ इलेक्ट्रोनिक्स डिवाइस भी होते हैं। उन्हें भी नुकसान पहुंचाता है। कुछ क्षेत्रों में दोहरी तारबंदी और सघन झाडिय़ों की मदद से आंधी की गति से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।
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‘टीलों के स्थिरीकरण के लिए हमने एक विशेष प्रोजेक्ट तैयार किया है जो शीघ्र ही बीएसएफ को दे दिया जाएगा।’
डॉ ओपी यादव, निदेशक, काजरी जोधपुर