
जोधपुर.
बचपन की सगाई को नकार शादी से इनकार पर जातीय पंचों की ओर से सोलह लाख रुपए दण्ड वसूलने व परिवार को समाज से बहिष्कृत करने की धमकी से आहत होकर जहरीला पदार्थ खाने वाली सीए छात्रा ने मंगलवार को सहायक पुलिस आयुक्त के समक्ष दर्ज बयानों में आरोप दोहराए। जांच अधिकारी ने मौका मुआयना करने के साथ ही चार-पांच गवाहों के बयान भी दर्ज किए हैं। फिलहाल राजनीतिक व आर्थिक रूप से प्रभावशाली आरोपियों के खिलाफ पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर पाई है।
सहायक पुलिस आयुक्त नारायण सिंह ने बताया कि प्रकरण में पीडि़त सीए छात्रा दिव्या चौधरी की हालत में काफी सुधार है। उसके दुबारा बयान दर्ज किए गए हैं। उसने जबरन शादी के लिए दबाव डालने वाले गायत्री नगर (थोरियों की ढाणी) निवासी बंशीलाल थोरी, शंकर थोरी, पप्पाराम थोरी, गोपाराम थोरी और समाज से बहिष्कार कर पचास लाख रुपए के दण्ड डालने की धमकी देने के आरोपी पंच प्रभुराम घोचक, बागाराम सिंगड़, हरकाराम, सरपंच गोपाराम, धन्नाराम व नारायणराम आदि के खिलाफ आरोपों को दोहराया है। नैणों की ढाणी निवासी दिव्या चौधरी से बयान दर्ज कर पत्रावली में शामिल किए गए हैं।
इसके अलावा चार-पांच गवाहों ने भी बयानों में आरोपियों के खिलाफ शादी का दबाव डालने अन्यथा समाज से बहिष्कृत करने की धमकी देकर लाखों रुपए का जुर्माना वसूलने का आरोप लगाया है।
दबाव के चलते सात सालों से डिप्रेशन में हूं : छात्रा
उधर, डिगाड़ी चौकी में गत रविवार को जहरीला पदार्थ खाने वाली सीए छात्रा ने एक पत्र भी लिखा है। जिसमें उसका आरोप है कि बंशीलाल का परिवार जबरन शादी करने के लिए सात साल से दबाव डाल रहा है। शादी से इनकार के बाद भी अलग-अलग तरीकों से धमकाया जा रहा है। इससे वो सात साल से डिप्रेशन में है। बंशीलाल ने समाज के लोगों से मिल उसके परिवार पर दबाव बनाया। २५ अक्टूबर को पंचायत बुलाई गई, लेकिन छात्रा की शिकायत पर पुलिस पहुंच गई। इसका पता लगते ही सभी पंच गायब हो गए थे। इसके बाद पंच और दबाव डालने लग गए थे। वे पुलिस को बुलाने व उनके खिलाफ दर्ज एफआइआर को वापस लेने को धमकाने लगे थे। पूरा परिवार परेशान हो गया था।
परिवार के तीस सदस्यों ने पंचायत में हाथ जोड़े थे, लेकिन नहीं माने
गत २७ अक्टूबर को दुबारा पंचायत बैठी थी। जिसमें शादी न करने पर १६.३५ लाख रुपए का दण्ड वसूला गया था। इतना ही नहीं, पंचायत के बारे में पुलिस में शिकायत करने व एफआइआर दर्ज कराने के लिए पूरे परिवार को समाज से बहिष्कृत करने व अलग से दण्ड वसूलने की धमकियां दी गई थी। तब छात्रा के पिता पूराराम जाट व परिवार के तीस सदस्यों ने पंचायत में हाथ जोड़ आग्रह किया था कि उन्हें बहिष्कृत न किया जाए और न ही अलग से आर्थिक दण्ड डाला जाए। बल्कि १६.३५ लाख रुपए में जोड़ दिया जाए, लेकिन पंच नहीं मानें और २८ अक्टूबर को फिर से पंचायत बुलाई। जिसमें भारी भरकम दण्ड और वसूला जाना था। पंचों ने कहा था कि पुलिस में दर्ज एफआइआर वापस लेने के दस्तावेज पंचायत में पेश करने होंगे। इसी के चलते छात्रा और दबाव में आ गई थी। एफआइआर वापस लेने के लिए बयान दर्ज कराने वह भाई व चाचा के साथ डिगाड़ी चौकी पहुंची, जहां उसने जहरीला पदार्थ खा लिया था।
जमीन बेचने की विवशता
छात्रा के भाई महिपाल का कहना है कि १६.३५ लाख रुपए दण्ड भरने के बाद दुबारा पंचायत में फिर से भारी भरकम दण्ड डाले जाने की आशंका थी। पिता ६ एफओडी में नौकरी करते हैं। एेसे में पंचों का फरमान जारी होने के बाद जमीन बेचकर दण्ड भरने को विवश होना पड़ता।