
जोधपुर. मेरा नाम दीक्षा सक्सेना है। मैं एक टीचर हूं। कई टीचर्स की तरह मेरी भी लॉकडाउन में जॉब चली गई हालांकि कुछ ही दिनों में ऑनलाइन इंटरव्यू करके मैंने दोबारा से टीचिंग जॉब प्राप्त कर ली लेकिन सैलेरी को लेकर कॉम्प्रोमाइज करना पड़ा। तब मैंने अपने cake बनाने के शोक की ओर रुख किया। मैंने तीन दिन ऑनलाइन बैकिंग क्लास अटैंड की और चौथे दिन केक बनाना शुरू कर दिया। घर वालों को केक खिलाने से शुरू हुआ सफर कुछ ही दिनों में दोस्तों-रिश्तेदारों से होते हुए कॉमर्शियल स्टेज पर पहुंच गया। लोगों क्वालिटी और टेस्ट को देखते हुए मुझे ऑर्डर पर ऑर्डर दिए और मैं केक बनाती गई। अब टीचिंग के साथ केक मेरी सैकेण्ड इनकम हो गई है। मैं पूरी तरीके से फाइनेंशियल सिक्योर हू। मेरे कस्टमर्स भी स्थाई हो गए हैं। वैसे cake बनाना मेरा शौक था। शौक का आजीविका बन जाना, बहुत बेहतर रहता है।
2 साल में बनाए 700 केक, फादर्स डे पर खूब बिके
मैंने अपना बिजनेस मई 2020 में शुरू किया था और करीब दो साल में मैंने 700 से अधिक केक तैयार करके बेचे हैं। केक की बिक्री बढऩे पर मैंने इंस्टाग्राम एकाउंट भी खोला और केक बनाकर वहां मार्केटिंग भी किया। सोशियल मीडिया की मार्केटिंग भी लोग धीरे-धीरे जुडऩे लगे। फादर्स-डे के दिन मेरे सर्वाधिक केक बिके और उसी महीने सर्वाधिक ग्रोथ भी हुई।
टेस्ट व फ्रैशनेस के कारण पसंद आया
लॉकडाउन मेें वैसे तो कइयों ने केक का बिजनेस शुरू किया। इसमें कॉम्पीटिशन भी अधिक था लेकिन मैंने अपने प्रोडक्ट की क्वालिटी बेहतर रखी। केक का टेस्ट और फ्रैशनेस बाजार में मिलने वाले अन्य केक की तुलना में कहीं अधिक बेहतर था, जिसके चलते मेरा प्रोडक्ट लोगों को काफी पसंद आया। वैसे केक की बिक्री इसलिए भी बढ़ी क्यों अब मिठाई का ट्रेंड कम हो गया है। लोग जन्मदिन मनाने वाले को मिठाई की जगह केक व चॉकलेट गिफ्ट में देते हैं। आजकल एक व्यक्ति अपने जन्मदिन पर तीन से चार केक काटता है इसलिए केक का बिजनेस भी बढ़ा है।
ऐसे हुई आय में वृद्धि
मई 2020----- 5 प्रतिशत
अक्टूबर 2020 -----20 प्रतिशत
फरवरी 2021----- 35 प्रतिशत
जुलाई 2021 ----- 40 प्रतिशत
जनवरी 2022 ----- 50 प्रतिशत
सफलता के मंत्र
1 आप कोई भी कार्य करें, उसमें पॉजिटिविटी बनाए रखिए।
2 हम में से कई लोग इसलिए असफल रह जाते हैं कि जब वे सफलता से कुछ कदम ही दूरी पर रहते हैं तो हताश होकर अपने कदम पीछे खींच लेते हैं।
3 हर अंधेरे के बाद सूर्य अवश्य निकलता है। उम्मीद बनाए रखिए। आपका भी सूर्य उदय की प्रतीक्षा कर रहा है।
4 मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। आज हम जिन चीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वे किसी न किसी की कड़ी मेहनत का ही नतीजा है।
5 फसल बौने और काटने के मध्य अंतराल होता है। यह हम किसान से सीख सकते हैं।