
NAND KISHORE SARASWAT
जोधपुर. राजस्थान पत्रिका में 1 अप्रेल को प्रकाशित समाचार 'मंडोर का सुरपुरा क्षेत्र बन सकता है नया इॅको टूरिज्म स्पॉटÓ के बाद वैज्ञानिकों व पर्यावरण के क्षेत्र में सक्रिय एनजीओ ने जनसहभागिता से वन्यजीवों के आवास स्थलों का संरक्षण एवं संवद्र्धन की अभिनव पहल की है।
वन्यजीव बहुल क्षेत्र में विलायती बबूल उन्मूलन कर वन्यजीवों के आवास व विचरण स्थल विकसित किए जा रहे हैं। क्षेत्र में वन्यजीवों की प्यास बुझाने खेलियों में भी टैंकरों से पानी की व्यवस्था किए जाने से ब्लेक बक के समूह और अन्य प्रजातियों के वन्यजीव स्वच्छंद विचरण करने लगे है। क्षेत्र में राजस्थान पत्रिका के सहयोग से पक्षियों के लिए 200 से अधिक परिंडे पेड़ों पर लगाकर नियमित देखभाल शुरू की गई है।
वन्यजीव संरक्षण नवाचार में जेएनवीयू के वाइल्डलाइफ रिसर्च एण्ड अवेयरनेस सेन्टर के निदेशक डॉ. हेमसिंह गहलोत, सुरपुरा ग्राम पंचायत क्षेत्र के लोगों की सहभागिता तथा सृष्टि सेवा संस्थान के सदस्यों ने काले हरिणों के हैबिटैट रीस्टोरेशन के लिए प्रथम चरण में विलायती बबूल उन्मूलन का कार्य शुरू किया है। इस काम में सुरपुरा गांव के पर्यावरण प्रेमी रविंद्र देवड़ा, मुकेश देवड़ा, सुभाष बिश्नोई, मुकेश, नरपत, मूलाराम विश्नोई आदि सहयोग कर रहे हैं। सृष्टि सेवा संस्था के अरविन्द भाटी, छंवर सिंह भाटी, त्रिलोक चन्द, प्रदीप गहलोत, नेपसा, मुकेश देवड़ा, कुलदीप गहलोत पक्षियों के लिए परिण्डे लगाने व जूलीफ्लोरा हटाने में जुटे हैं। डॉ. गहलोत ने बताया कि पर्यावरण संतुलन में प्रकृति के विभिन्न घटक में शामिल वन एवं वन्यजीवों का होना भी जरूरी है। ऐसे में काले हरिणों, रोजड़ों सहित कई प्रजातियों के वन्यजीवों व पक्षियों की शरणस्थली व विचरण क्षेत्र विकसित किया जाएगा।