जोधपुर

CBSE Toppers ने शेयर किए सक्सेस मंत्र, कहा Social Media के कम और सही उपयोग से मिलेगी सफलता

एक्सपर्ट ने कहा, सोशल मीडिया पर टाइम पास की बजाय गुड यूटीलाइज करना बेहतर विकल्प  
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CBSE Toppers ने शेयर किए सक्सेस मंत्र, कहा Social Media के कम और सही उपयोग से मिलेगी सफलता

अविनाश केवलिया/जोधपुर. फेसबुक-इंस्टाग्राम पर फोटो अपलोड करना। स्टेटस डालना और हर घड़ी अपने लाइक-कमेंट चेक करना यह यूथ की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। लेकिन कुछ युवा ऐसे भी हैं जिन्होंने महीनों तक या तो सोशल मीडिया से दूरी बना ली या फिर उसका उपयोग भी किया तो स्टडी मेटेरियल के रूप में। ये एक्सीरियंस खुद यूथ आइडल्स ने ही शेयर किए हैं। ये वे आइडल्स हैं जिन्होंने हाल ही में सीबीएसई के परीक्षा परिणामों में टॉप किया है। इन टॉपर्स ने सोशल मीडिया के प्रति अपने नजरिए को बता कर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

सोशल मीडिया जो फेक न्यूज परोसने के कारण अपनी विश्वसनीयता दिन ब दिन खोता जा रहा है उसको लेकर टॉपर्स ने जो अपनी बात रखी वह काफी अहम है। कुछ टॉपर्स ने कहा कि वे सोशल मीडिया का उपयोग करते ही नहीं। कुछ ने कहा कि वह परीक्षा के दिनों में इससे दूर हो गए। वहीं जयपुर की एक टॉपर ने कहा कि वह सोशल मीडिया व इंटरनेट का उपयोग तो करती थी लेकिन सिर्फ स्टडी मेटेरियल के लिए। टॉपर्स की इन बातों से एक बात तो स्पष्ट है कि सोशल मीडिया के प्रति यूथ को अपना नजरिया बदलना होगा। विशेष तौर पर वे यूथ तो टीन एज से गुजर रहे हैं और किसी न किसी परीक्षाओं की आपाधापी में लगे हैं।


दूरी की बजाय हो सही दिशा में नजदीकी

सोशल मीडिया से दूरी रखना किसी का विजन हो सकता है। लेकिन बेहतर यह है कि सही नजदीकी हो। सोशल मीडिया को पॉजिटिव रूप में उपयोग किया जा सकता है। मनो चिकित्सक डॉ. जी.डी कूलवाल ने विशेषज्ञ के तौर पर बात करते हुए पत्रिका को बताया कि सोशल मीडिया का सकारात्मक रूप देखना चाहिए। किसी न किसी चीज के बारे में जानकारी लेने का अच्छा साधन है। स्टूडेंट स्टडी मेटेरियल के रूप में सोशल मीडिया का उपयोग करे तो अच्छा है। लेकिन होता क्या है कि ज्यादातर यूथ वीडियो गेम और अन्य गेम में लग जाते हैं। सोशल कम्यूनिकेशन और अपने परिवार से दूरी बना लेते हैं। इसी कारण सोशल मीडिया के दुष्परिणाम सामने आते हैं।


जीतने की झूठी आदत लग जाती है

मनोवैज्ञानिक और सोशल मीडिया एक्सपर्ट बताते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के गेम खेलने की लत जब यूथ को लग जाती है तो उन्हें जीतने की झूठी आदत सी हो जाती है। गेम में हमेशा जीतते रहते हैं लेकिन रियल लाइफ में जब हार होती है तो बर्दाश्त नहीं कर पाते। किसी पेपर में कम नम्बर लाकर दूसरों से पिछड़ते हैं तो अपने आप को नुकसान पहुंचा लेते हैं। वे काल्पनिक दुनिया में ज्यादा रहते हैं। ऐसे में वास्तविकता से रूबरू होते हैं तो एडजस्ट नहीं कर पाते।

यों समझें सोशल मीडिया और डिजिटल स्टडी के फायदे
- 10-12 साल के किशोर के हाथ में मोबाइल और उसमें इंटरनेट सुविधाएं हैं। इसलिए डिजिटल स्टडी उसकी जरूरत बन गई है।
- रियल टाइम लर्निंग का एक चलन बढ़ रहा है। ऐसे में डिजिटल स्टडी आवश्यक है।
- यूथ और स्टूडेंट दूसरे बच्चों के साथ एजुकेशनल इंटे्रक्शन कर सकते हैं।
- सोशल मीडिया पर लाइव क्लासेज स्टूडेंट्स की नॉलेज बढ़ा सकते हैं।
- बड़े बिजनेस मैन और सफल व्यक्तियों की सक्सेस स्टोरी भी डिजिटल स्टडी के जरिये स्टूडेंट का उत्साहवार्धन करती है।
- करंट हैपनिंग से रूबरू करवाने में सोशल मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है।
- डायरेक्ट टू डिवाइस तकनीक के जरिये ग्रामीण स्टूडेंट भी आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जुड़ रहे हैं।

Published on:
10 May 2019 02:14 pm