
- कई महिला बंदी १० वी से लेकर एम.ए तक पढ़ाई कर चुकी
जोधपुर. जेल का नाम सुनते ही अपराधी और खौफनाक चेहरे सामने आते हैं। हर कोई जेल और उसके जीवन को नकारात्मक भाव से ही देखता है। लेकिन जोधपुर केन्द्रीय कारागृह में महिला जेल के हालात बिल्कुल उलट है। शिक्षा और रोजगार से जोडऩे के लिए यहां बेहतर अवसर दिये जा रहे हैं। यह समाज के लिए सकारात्मक संदेश दे रही है।
यहां जेल में बंद महिलाओं ने शिक्षा की डगर चुनी और जेल के बाद के अपने जीवन को सुखद बनाने में जुट गई। एेसी महिला बंदी जो करीब सात-आठ साल पहले जेल में आई थी, अब एम.ए पास कर चुकी है। साथ ही उद्योग और हाथ कारीगरी में भी यह अपना नाम रोशन कर रही है। जेल में दो युवतियां तो पढ़-लिख काबिल बनी और अब जेल से निकल कर प्राइवेट नौकरी के जरिये माता-पिता के जीवन यापन में सहयोग कर रही है।
केस १
महिला बंदी संध्या और कमलेश जेल में आई तो १२वीं पास थी। जेल में रहते हुए दोनों ने एम.ए उत्तीर्ण किया। इसके बाद जेल से रिहा हुई और अब दोनों प्राइवेट नौकरी कर रही है। जीवन यापन में अपने माता-पिता का हाथ बंटा रही है। केस २
महिला बंदी हिरा वर्ष २०१० में जेल में आई थी। तब १०वीं पास थी। जेल में रहकर ही पढ़ाई और एम.ए परीक्षा उत्तीर्ण की। अब अन्य महिला बंदियों को पढ़ाती है।
केस ३
तमन्ना और रेखा दोनों महिला कैदी प्रहरी मंजू सैनी व अमिता के सान्निध्य में अंग्रेजी बोलना सीख रही है। वह अन्य महिला बंदियों को भी प्रेरित करती है और इसका अभ्यास करवाती है।
इनका कहना...
जेल में महिलाओं को शिक्षा देने के साथ ही हुनरमंद भी बनाया जाता है। कई महिलाएं जेल में आई तो १०वी पास थी लेकिन अब एम.ए तक पढ़ाई कर चुकी है। कई महिलाएं हस्तशिल्प में निपुण हो गई है। उनके उत्पाद बिक्री किए जाते हैं।
- सम्पति बामणिया, जेलर व प्रभारी महिला जेल, जोधपुर।