
सेतरावा (जोधपुर). केन्द्रीय अध्ययन दल ने सोमवार शाम सेतरावा पहुंचकर किसानों का दर्द जाना। दल में संयुक्त निदेशक शोमिता बिस्वास, निदेशक बीके श्रीवास्तव, सहायक आयुक्त मनरेगा मोतीराम, निदेशक डॉ. बी.के.पाटिल थे।
इनके साथ अपर जिला कलक्टर अंजुम ताहीर समा, देचू तहसीलदार निरभाराम व संयुक्त निदेशक पशुपालन जेपी नंदवानी थे। इन सभी ने सेतरावा के आईटी केन्द्र में किसानों व ग्रामीणों से मुलाकात की।
दल के सदस्यों ने किसानों व ग्रामीणों से इस वर्ष क्षेत्र में बारिश, हालात व मौसमी प्रकोप के संबध मेंचर्चा की। किसानों की ओर से सेतरावा सरपंच गोपालसिंह, पूर्व उप सरपंच सुमेरसिंह आदि ने क्षेत्र के हालात से अवगत करवाया।
किसानों ने बताया कि क्षेत्र में खरीफ सीजन की बारिश इस बार देरी से हुई। जिससे समय पर किसान बुवाई नहीं कर सके। तेज आंधी ने किसानों की नन्हीं पौध पर रेत फेर दी। बाद में बारिश नहीं हुई। बारिश की कमी की वजह से खरीफ फसलों की पैदावार आशानुरूप नहीं हो पाई। बाद में आए टिड्डी दलों ने किसानों की बाजरे की रही सही फसल को भी चट कर दिया। किसानों के हाथ कुछ नहीं लग पाया। क्षेत्र में अकाल के हालात हैं। पशु शिविर व चारा डिपो सहित अकाल राहत कार्य खोलने की आवश्यकता जताई।
किसानों ने बताया कि जिन सिंचित इलाकों में मूंगफली व कपास आदि की फसलें थी वे शुरुआती बारिश में देरी के कारण पिछड़ गए। बाद में बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि ने किसानों को तबाह कर दिया। मूंगफली व कपास की फसलें 80 से 90 प्रतिशत तक खराब हो गईं। अब क्षेत्र में मूंगफली का चारा खराब होने से पशुधन के लिए चारे का संकट पैदा हो गया है।
ग्रामीणों ने क्षेत्र में अकाल के हालात देखते हुए खाद्य सुरक्षा योजना के अन्तर्गत मिलने वाले प्रति व्यक्ति अनाज की मात्रा को अपर्याप्त बताते हुए अनाज की प्रति व्यक्ति मात्रा बढ़ाने की मांग की है।
इस संवाद कार्यक्रम में ग्राम विकास अधिकारी प्रेमसिंह भाटी, वार्डपंच जब्बरसिंह, कांग्रेस नेता मोहनसिंह, बीएल शर्मा आदि उपस्थित थे।