जोधपुर

अब यूनिक आईडी से ही सर्टिफिकेट जारी करेंगे चार्टर्ड एकाउंटेंट

- पंजाब नेशनल बैंक में नीरव मोदी घोटाले मामले में सीए की कथित भूमिका सामने आने के बाद आईसीएआई ने उठाया कदम - लोन लेने से लेकर ऑडिट के हर कागज पर सीए को करना होगा यूनिक नम्बर से रजिस्ट्रेशन - यूडीआईएन पोर्टल से जारी होगी आईडी
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अब यूनिक आईडी से ही सर्टिफिकेट जारी करेंगे चार्टर्ड एकाउंटेंट


जोधपुर. चार्टर्ड एकाउंटेंट अब किसी भी दस्तावेज को केवल अपनी सील और हस्ताक्षर से ही प्रमाणित नहीं कर पाएंगे और न ही किसी थर्ड पार्टी के लिए सीए का फर्जी सर्टिफिकेट जारी करना आसान होगा। सीए द्वारा जारी हर सर्टिफिकेट के ऊपर अब यूनिक डोक्यूमेंट्स आइडेंटिफिकेशन नम्बर (यूडीआईएन) होगा, जो पूरे देश में यूनिक व मान्य होगा। इससे सर्टिफिकेट के ऑनलाइन वैद्यता की आसानी से जांच हो सकेगी।

दी इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने पंजाब नेशनल बैंक में नीरव मोदी घोटाले के मामले में सीए की कथित भूमिका सामने आने के बाद यह कदम उठाया है। सीए द्वारा अब कोई भी सर्टिफिकेट जारी करने से पहले उसे 222.ह्वस्रद्बठ्ठ.द्बष्ड्डद्ब.शह्म्द्द पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसमें प्रत्येक सर्टिफिकेट के प्रमाणीकरण के लिए विशेष आईडी नम्बर जारी होंगे, जो पूरे देश में किसी दस्तावेज के लिए यूनिक होंगे। इससे सीए द्वारा जारी किसी भी दस्तावेज की प्रमाणिकता पूरे देश में होगी। सीए के नाम व उसकी सील की आड़ में कोई भी व्यक्ति फर्जी सर्टिफिकेट नहीं बना सकेंगे।


लोन से लेकर ऑडिट तक पड़ेगा असर
अब तक सीए केवल अपनी सील और हस्ताक्षर से ही किसी दस्तावेज को प्रमाणित करता था। बाजार में नकली सील बनने से कई थर्ड पार्टियां स्वयं ही सर्टिफिकेट जारी करके फर्जी वित्तीय लाभ प्राप्त कर लेती थी, वहीं कुछ स्थितियों में सीए भी ऐसे सर्टिफिकेशन जारी करके अन्य को अनुचित लाभ पहुंचाते थे। बैंंक में लोन लेने के लिए सीए का सर्टिफिकेट महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में कइयों ने सीए के फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर बड़े लोन हासिल कर लिए। जीएसटी सहित अन्य करों में चोरी के लिए फर्जी सर्टिफिकेट का इस्तेमाल किया जाता है। ऑडिट में भी गबन को छिपाने के लिए जाली सर्टिफिकेट उपयोग में लाए जाते रहे हैं। यूडीआईएन के बाद सीए की फर्जी प्रेक्टिस बंद हो जाएगी।

दस्तोवज प्रमाणीकरण का होगा विशेष नम्बर

सीए की ओर से जारी प्रमाण पत्र को अब यूनिक आईडी नम्बर देना होगा, जिससे अन्य लोगों द्वारा जारी फर्जी प्रमाण पत्र की जांच आसानी से हो पाएगा। यूनिक आईडी नम्बर ऑनलाइन जारी होगा जो प्रत्येक दस्तावेज के लिए यूनिक होगा।
अजय सोनी, अध्यक्ष, आईसीएआई जोधपुर

Published on:
11 Jul 2018 09:08 pm