
वीडियो : एस के मुन्ना/जोधपुर. आस्था, विश्वास और सूर्योपासना से जुड़ा महापर्व डाला छठ पूजन का समापन हर्षोल्लास से बुधवार को हुआ। पूर्वोत्तर राज्यों की लोक संस्कृति उस वक्त साकार हो उठी, जब शहर के विभिन्न पवित्र जलाशयों पर पारम्परिक लोक गीतों के बीच छठ व्रतियों ने ढलते सूर्य को प्रथम अघ्र्य प्रदान किया। सूर्यास्त से पूर्व बिहार, झारखंड, उत्तरांचल, उत्तरप्रदेश, की प्रवासी महिलाएं परिजनों के साथ छठ पूजन के लिए शेखावतजी का तालाब, रातानाडा गणेश मंदिर के पास स्थित जलाशय के तट पर पारम्परिक मंगल गीत गाते हुए पहुंची। उत्साह उमंग के माहौल में निराहार-निर्जल व्रत रखने वाली व्रती महिलाओं ने बांस की टोकरी में कंद-मूल, ऋतुफल, अदरक, ईख, आंवला, मूली व घरों में बना परम्परागत ठेकुआ प्रसाद सजाने के बाद अस्तांचलगामी सूर्य को प्रथम अघ्र्य प्रदान किया। माथे पर लंबा कुंकुम का टीका और नए परिधान पहने महिलाओं ने सूर्यपूजन के बाद परिवार में खुशहाली, सौभाग्य व समृद्धि की प्रार्थना की। जलाशय के घाट पर मेले से माहौल में प्रवासी लोगों ने जमकर आतिशबाजी कर खुशियों का इजहार किया। बासनी औद्योगिक क्षेत्र, रातनाडा कुड़ी भगतासनी, एयरफोर्स, सैन्यक्षेत्र, मधुबन हाउसिंग बोर्ड में निवासरत पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों में छठ पूजन को लेकर खासा उत्साह नजर आया।