
जोधपुर। कोरोना की वजह से राष्ट्रीय व राज्य खेल संघों की प्रतियोगिताओं पर ब्रेक लग गया है। ऐसे में प्रदेश के 3 लाख से अधिक खिलाडिय़ों की उम्मीदें बेपटरी हो रही है। देशभर के विद्यार्थियों को तो प्रमोट कर अगली कक्षा में प्रवेश दे दिया गया है, लेकिन खिलाड़ी अब भी राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद व अन्य खेल संगठनों से अपने भविष्य को लेकर गाइडलाइन का इंतजार ही कर रहे हैं।
खिलाडिय़ों का कहना है कि देशभर में प्रतियोगिताएं आयु वर्ग के हिसाब से होती है। इस साल प्रतियोगिताएं नहीं होने से खेल संघों को भी इस साल जीरो सेशन मानते हुए खिलाडि़यों को आयु की बाध्यता में एक साल की छूट देनी चाहिए।
कोरोना काल में जिन खिलाडि़यों की आयु पूरी हो रही है और जो इस साल खेल नहीं पाए उनको अगले साल मौका मिलना चाहिए। समस्त खेल संघों को मिनी टूर्नामेंट करवाने चाहिए ताकि खिलाड़ी को उस लेवल का प्रमाण पत्र मिल जाए और वह उसके कॅरियर मे काम आ सके।
-डॉ अमानसिंह सिसोदिया, विभागाध्यक्ष
शारीरिक शिक्षा विभाग, जेएनवीयू जोधपुर
खिलाडिय़ों का दर्द
कोरोना के कारण इस साल कोई भी खेल प्रतियोगिता नहीं हुई। इससे स्कूल-कॉलेज स्तर के लाखों खिलाडिय़ों को नुकसान हो रहा है। राज्य सरकार को स्कूल स्तर और भारत सरकार को विश्वविद्यालय स्तर पर खिलाड़ी हित में फैसला लेना चाहिए।
- भूपेन्द्रसिंह सांकड़ा, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष
शारीरिक शिक्षा विभाग जेएनवीयू जोधपुर
पूरे देश में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे खिलाडिय़ों को निराशा का सामना करना पड़ा क्योंकि भारतीय विश्वविद्यालय संघ ने खेलों का आयोजन नहीं करवाया। परिणामस्वरूप अंतर महाविद्यालय प्रतियोगिताएं भी नहीं हुई। भारतीय विश्वविद्यालय संघ को अगले सत्र में नियमों बदल कर खिलाडिय़ों को आयु में छूट देनी चाहिए ताकि इस वर्ष प्रतियोगिता से वंचित रहे खिलाडिय़ों को भी अवसर मिल सके।
- मनोहर सिंह, सॉफ्टबॉल खिलाड़ी
प्रतियोगिताएं नहीं होने से निरंतर प्रशिक्षण ले रहे खिलाडिय़ों की मेहनत पर पानी फि र गया। खेल संघों को कोरोना गाइडलाइन के अनुसार खेल प्रतियोगिताएं करवानी चाहिए।
- तयब खान, बास्केटबॉल खिलाड़ी