
अविनाश केवलिया. जोधपुर।
कोरोना ने जब सभी सेक्टर को प्रभावित किया तो इससे यूथ आइडियेशन बेस्ड स्टार्टअप इकोसिस्टम कैसे अछूता रहता। पिछले डेढ़ साल में इस सेक्टर को भी काफी झटका लगा। नई एप्लीकेशन को स्वीकृत करने की प्रक्रिया भी धीमी हो गई है। अब प्रदेश सरकार इसको गति देने के लिए प्रत्येक संभाग मुख्यालय पर एक इन्क्युबेशन सेंटर खोलने की तैयारियां में तेजी ला रही है। आगामी 6 माह से लेकर एक साल में यह सेंटर खुल जाएंगे।
कैसे स्टार्टअप को मिले पिच
नवाचार के साथ जो बिजनेस आइडिया लाए जाते हैं उनको स्टार्टअप के तौर पर पंजीयन कर उनको सीड फंडिंग, इंक्युबेशन और एक्सपर्ट से मदद दिलवाने के साथ उसको एक सही मायने का व्यापार स्थापित करने की मदद सरकार आई-स्टार्ट पोर्टल के जरिये करती है।
फैक्ट फाइल
- 2309 कुल स्टार्टअप की एप्लीकेशन प्रदेशभर से आई हैं
- 1391 स्टार्टअप अप्रूव्ड हुए हैं
- 676 क्यू रेटेड स्टार्टअप
- 58 सस्टेंनेंस अलाउंसेंस
- 103 इंक्युबेटेड स्टार्टअप
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क्या है इन्क्युबेशन सेंटर
ऐसे सेंटर जहां स्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं को बैठने की डेस्क, चार्जिंग व्यवस्था और इंटरनेट जैसी सुविधाएं एक साल के लिए निशुल्क दी जाती है। यह इसलिए ताकि शुरुआती साल में उनका ऑफिस खर्च बचे और सेंटर्स पर मौजूद मेंटर्स भी उनकी ग्रोथ में निशुल्क मदद करते हैं। अभी जयपुर में एक बड़ा सेंटर संचालित है, लेकिन अब जोधपुर सहित प्रत्येक संभाग मुख्यालयों पर भी यह सेंटर्स शुरू करने की तैयारियां तेज हो गई हैं।
स्टार्टअप रजिस्टे्रशन के बाद फायदे
स्टार्टअप रजिस्ट्रेशन के कई सारे फायदे भी हैं। चुनिंदा स्टार्टअप को सरकार एक साल तक प्रतिमाह 10 रुपए का सस्टेनेंस अलाउंस देती है। इसके अलावा इंवेस्टर्स के सामने कैसे अपना प्रोजेक्ट रखना है यह मेंटर्स सिखाते हैं और सीड फंडिंग भी करवाई जाती है। लोन व महिला एन्टरप्रेन्योर को विशेष सुविधा भी दी जाती है।