जोधपुर

Jaswant Sagar Dam : नहरों के अस्तित्व पर संकट, खाली पड़ा जसवंत सागर

जसंवत सागर बांध नहीं भरने से इन नहरों में पानी नहीं आया। आज देखा जाए तो करोड़ों रुपए सरकार ने इन नहरों की मरम्मत करने को लगाए, लेकिन दो वर्ष में फिर से जर्जर हो चुकी है और इन नहरों मे कंटीली झाडियां उग आई है।

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Feb 03, 2024
Jaswant Sagar Dam : नहरों के अस्तित्व पर संकट, खाली पड़ा जसवंत सागर

बिलाड़ा (जोधपुर) . जोधपुर जिले का सबसे बड़ा एवं भराव क्षेत्र वाला यह बांध जसवंत सागर नौ नदियों-निन्यानवे बाळों के पानी से भरता था। इस बांध पर चादर चलने पर जो पानी बहता, वहीं से लूणी का उदगम होता है। अब वहीं बांध बरसों से खाली पड़ा है। बांध में पुष्कर के नाग पहाड़ तक का पानी आता था। अब स्थिति यह है कि लगातार कम बारिश से न तब छोटे-बड़े एनिकट या बांधों में पानी भरता है और न ही बहते पानी को लूणी नदी तक पहुुंचने देते हैं।

जसवंत सागर के बाद आसपास के गावों में नहरों के जरिए पानी जाता था, जो कई किसानों को नहरों के पानी से अपनी सिंचाई किया करते थे। नहरें जर्जर होने के बाद दो साल पहले इनकी मरम्मत करवाई गई, लेकिन जसंवत सागर बांध नहीं भरने से इन नहरों में पानी नहीं आया। आज देखा जाए तो करोड़ों रुपए सरकार ने इन नहरों की मरम्मत करने को लगाए, लेकिन दो वर्ष में फिर से जर्जर हो चुकी है और इन नहरों मे कंटीली झाडियां उग आई है।

ये गांव होते थे खुशहाल

जसवंत सागर बांध भरने के बाद कई गांवों के किसानों के खेतो की बुवाई होती थी। उसके बावजूद बांध के भरे रहने से इसके सीपेज से पास में ही बहने वाली पौराणिक बाणगंगा नदी बारह मास बहा करती थी, जिससे लाम्बा, बाला एवं भावी गांव के तालाब बारह मास भरे रहते थे। इन गांवों की गंवाई राजस्व भूमि की पिलाई भी होती थी, जिससे सिंचाई विभाग को भी खास राजस्व प्राप्त होता था।

इन गांवों में नहरों से सिंचाई

नहरों से बिलाड़ा कस्बे का चक नम्बर 3, बड़ी कला, बड़ी खुर्द, मालकोसनी, गुजरावास, पड़ासला कलां, पड़ासला खुर्द, हरियाड़ा, खुंटलिया, होलपूर, भावी, बाळा, लाम्बा, पिचियाक एवं बिजासनी गांवों के किसानों के खेत हरियाली से भर उठते थे।

Published on:
03 Feb 2024 03:56 pm
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