
जोधपुर।
कोरोना से प्रभावित होने वाले प्रमुख व्यवसायों में ज्वैलरी व्यवसाय भी है। भारत में सोना संस्कृति, परंपरा, सौंदर्य के साथ सुरक्षित निवेश का सबसे बड़ा विकल्प माना जाता है। भारतीयों में सोने का आकर्षण हमेशा से रहा है, इसलिए भारत सोने की सबसे ज्यादा खपत वाले देशों में से एक है। पारंपरिक रूप से देश में सोने की ज्यादातर खपत आभूषणों की है। लेकिन पिछले दो सालों से कोरोना की मार से ज्वैलरी व्यवसाय प्रभावित हुआ है। इससे पारंपरिक सर्राफा बाजार, ज्वैलरी मार्केट, शोरूम्स आदि में ग्राहकों के कदम नहीं पड़ रहे है। लेकिन अब ज्वैलर्स को धनतेरस-दीपावली फेस्टिवल सीजन के साथ आगामी वैवाहिक सीजन से ज्वैलरी व्यवसाय में अच्छे कारोबार की उम्मीद है।
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अभी भावों में नरमी, खरीदारी का अच्छा मौका
कोरोना में मांग व खपत नहीं होने के बावजूद भी सोने के भाव आसमान पर थे। लेकिन हाल ही कुछ समय से सोने में आई बडी गिरावट पर आभूषण कारोबारियों का अनुमान कि इससे लंबे समय बाद ज्वैलरी कारोबार में रौनक लौटी है। कोविड के बाद से सोने में लगातार तेजी से ज्वैलरी कारोबार में ग्राहकों की बेरुखी से त्रस्त बाजारों में सोने में आई गिरावट से ग्राहकों में खरीदारी को लेकर रुझान हो रहा है।
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श्राद्ध पक्ष के बाद अच्छे बिजनेस की उम्मीद
कारोबारियों के अनुसार, ज्वैलरी सेक्टर की तीसरी लहर की आशंका के साथ बड़ा निवेश रुका हुआ है। कोरोना की खतरा टलने पर लोग सोने में जमकर निवेश करेंगे। वहीं, अच्छी बारिश नहीं होने से भी बाजार में खरीदारी पर ब्रेक लगा हुआ है। कुछ दिनों बाद श्राद्ध पक्ष शुरू हो जाएगा, इस अवधि में कारोबार कम रहेगा। लेकिन श्राद्ध पक्ष के बाद नवरात्रि, धनतेरस, दीपावली पर अच्छा बिजनेस होने की उम्मीद है।
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कोरोना की तीसरी लहर की संभावनाओं को देखते हुए ज्वैलरी में निवेश कम हो रहा है। अभी भावों में करीब एक हजार रुपए की नरमी है, यह खरीदने का अच्छा मौका है। इसके बाद त्यौहारी व वैवाहिक सीजन में भाव तेज होने की उम्मीद है।
नवीन सोनी, उपाध्यक्ष
इंडिया बुलियन ज्वैलर्स एसोशिएसन राजस्थान
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कोरोना के कारण ज्वैलरी व्यवसाय प्रभावित हुआ। अब धीरे-धीरे व्यवसाय पटरी पर आ रहा है। आगामी त्यौहारी व वैवाहिक सीजन में अच्छा कारोबार की उम्मीद है।
अमित सोनी, ज्वैलर
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