
जोधपुर।
केन्द्र सरकार की ओर से डिजीटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए देश के रेलवे आरक्षण कार्यालयों में टिकट के ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था की गई ई। रेलवे द्वारा आरक्षण कार्यालय में टिकट भुगतान की सुविधा के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआइ) के साथ करार करते हुए रेलवे के सभी आरक्षण कायालयों में पोस मशीन लगाई गई। जिसके तहत यात्री रिजर्वेशन कराने के बाद क्रेडिट-डेबिट कार्ड से भुगतान कर सकता है। यात्री को भुगतान में नहीं बल्कि टिकट रद्द कराने के बाद रिफण्ड में देरी से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यात्री को टिकट रद्द कराने के बाद नोडल बैंक एसबीआइ द्वारा समय पर रिफ ण्ड का भुगतान नहीं होने से बैंक के चक्कर काटने पड़ रहे है। इससे यात्री इस सेवा से दूर होते जा रहे है।
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जिम्मेदारी बैंक की
रेलवे आरक्षण काउंटर से टिकट बुक कराने के बाद यात्री को अगर टिकट रद्द करवाना है तो रेलवे केवल यात्री का टिकट रद्द कर सकता है। रद्द टिकट की कमाण्ड या मैसेज बैंक को जाता है। इसके बाद बैंक की ओर से यात्री को 72 घंटे में भुगतान करना होता है। रेलवे आरक्षण विभाग के अनुसार बैंक की वजह से रिफ ण्ड में देरी होती है।
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यात्री काट रहे चक्कर
ऑनलाइन भुगतान में देरी के कारण कई यात्री आरक्षण कार्यालय व बैंकों के चक्कर लगा रहे है। आरक्षण कार्यालय में यात्री को टिकट काटने की जानकारी देकर रिफ ण्ड बैंक से करने का दिया जाता है। यात्री के बैंक जाने पर उसे पूरी जानकारी नहीं दी जाती है। इस कारण यात्री आरक्षण कार्यालय व बैंक के चककर काटते रहते है।
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3 माह बाद हुआ भुगतान
मैने सितम्बर माह में जोधपुर से जयपुर जाने के लिए ऑनलाइन टिकट बुक कराया था। किसी कारणवश मुझे टिकट रद्द कराना पड़ा। टिकट कैन्सिल व रिफ ण्ड के लिए आवेदन किया, जो करीब 3 माह बाद जनवरी माह में मिला।
अनिल कौशिक, यात्री
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रेलवे की ओर से संबंधित यात्री के टिकट रद्द की जानकारी मिलने के बाद ३-४ दिन में यात्री को रिफण्ड हो जाता है। अगर नहीं हो रहा है तो यह रेलवे की जिम्मेदारी है वह समय पर टिकट रद्द की जानकारी भेजे।
एसएन माहेश्वरी, चीफ मैनेजर
जनरल बैंकिंग, एसबीआइ