
न्यायाधीश दिनेश मेहता की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता अर्जुनसिंह सहित 23 याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिका को निस्तारित करते हुए कहा कि यदि याचिकाकर्ताओं की अनुबंध अवधि समाप्त होने के बाद सक्षम प्राधिकारी उनकी सेवा अवधि में विस्तार करना चाहें तो यह आदेश बाधक नहीं बनेगा। जिन याचिकाकर्ताओं की अनुबंध अवधि समाप्त हो रही है, वे सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपना अभ्यावेदन दे सकते हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आरएस सलूजा तथा सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता अनिल कुमार गौड़ ने पैरवी की। केंद्र पोषित बाल कल्याण योजना के तहत 9 दिसंबर, 2016 को प्रोटेक्शन अधिकारी तथा आउटरीच वर्कर्स के पद पर तीन वर्ष की संविदा पर नियोजन के लिए विज्ञप्ति जारी की गई थी।
इसके तहत अनुबंध पर नियोजित होने वाले याचिकाकर्ताओं के साथ पहले एक वर्ष का अनुबंध किया गया, जिसे बाद में कुल तीन साल या कुछ मामलों में उससे अधिक अवधि के लिए बढ़ाया गया। सरकार ने हाल ही 1 फरवरी को अनुबंध पर लगे ऐसे कार्मिकों को सेवा समाप्ति के लिए एक माह का नोटिस दिया था। इनमें से अधिकांश कार्मिकों की अनुबंध अवधि 28 फरवरी को ही समाप्त हो रही थी और कुछ की अगले साल फरवरी में समाप्त होनी थी। गौड़ ने कहा कि सरकार अब जॉर्ब चार्ज आधार पर प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से संविदा कार्मिकों की सेवा लेना चाहती है। कोर्ट ने अनुबंधित अवधि पूरी होने से पहले कार्मिकों को नहीं हटाने को कहा है।