
जोधपुर. निजी स्कूलों के खिलाफ शिक्षा विभाग भी कुछ नहीं करता। शिक्षाधिकारी अक्सर स्टेट बोर्ड से निजी स्कृूलों की मान्यता नहीं बताकर अपने कर्तव्यों से इतिश्री कर लेते हैं। ज्यादा दबाव आने पर अभिभावकों से लिखित शिकायत नहीं आने का हवाला देकर कार्रवाई से बचते है। जबकि कई बार जोधपुर में सीबीएसई मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के खिलाफ अभिभावक संगठनों ने प्रदर्शन किया, लेकिन अभिभावकों की मांगों पर शिक्षा विभाग ने कभी भी कोई बड़ा हस्तक्षेप नहीं किया।
सीबीएसई में जाने के लिए राज्य से एनओसी
सभी निजी स्कूल शुरुआती चरण में राजस्थान शिक्षा विभाग से मान्यता लेती है। बाद में अपनी संबद्धता सीबीएसई से लेती है। जबकि सीबीएसई से मान्यता लेने के लिए शिक्षा विभाग ही उन्हें अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करता है। लेकिन सीबीएसई में आते ही निजी स्कूलें मनमानी शुरू कर देती है। बेखौफ भी रहती है कि यहां उन पर कार्रवाई करने वाला कोई नहीं है।
प्रशासन भी शिकायत के बाद जांच सौंपता है शिक्षा विभाग को
कई अभिभावक प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री के नाम जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपते हैं। कभी-कभार सीधे कलक्टर से न्याय की गुहार लगाते हैं। ऐसे में अक्सर प्रशासन जांच शिक्षा विभाग को सौंपता है। शिक्षा विभाग की जांच भी जगजाहिर नहीं होती। निजी स्कूलों की मनमानी भी जारी रहती है।
इनका कहना है...
शिक्षा विभाग को जांच के पूर्ण अधिकार हैं। क्योंकि केवल संबद्धता बदलने से नियमों से कोई स्कूल नहीं बच सकता। कोई शिक्षाधिकारी सीबीएसई के स्कूल बता पल्ला झाड़ते है तो गलत है।
- प्रेमचंद सांखला, संयुक्त निदेशक, स्कूल शिक्षा, जोधपुर संभाग