
राजेश दीक्षित
जोधपुर. विधानसभा चुनाव 2018 को लेकर दावेदार टिकट के जुगाड़ में लग चुके हैं, लेकिन जोधपुर जिले की सरदारपुरा सीट से दावेदारों के नाम अभी खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। यहां कांग्रेस से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की एकमात्र दावेदारी रहती हैं। ऐसे में कांग्रेस में अन्य नाम नगण्य ही हैं, तो भाजपा में नाम तो सामने आ रहे हैं, लेकिन उसे हर बार यहां से हार का सामना करना पड़ा। भाजपा हर चुनाव में यहां जाति कार्ड के साथ प्रत्याशी बदलने की भी रणनीति अपनाती रही है। गहलोत अपनी परम्परागत सीट सरदारपुरा से ही लड़ते रहे हैं और चार चुनाव लगातार जीते हैं। भाजपा ने यूं बदली हर चुनाव में रणनीति
पहला चुनाव : वर्ष 1999-(उपचुनाव) वर्ष 1998 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का बहुमत आने पर अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बनाया गया। लेकिन वे चुनाव नहीं लड़े थे। तब सरदारपुरा से मानसिंह देवड़ा ने अपनी सीट खाली कर गहलोत को दी। उस समय भाजपा ने मेघराज लोहिया (वर्तमान राजसिको अध्यक्ष) को मैदान में उतरा था। गहलोत ने लोहिया को 49280 वोटों से शिकस्त दी थी।
दूसरा चुनाव : वर्ष 2003 में कांग्रेस से अशोक गहलोत दूसरी बार मैदान में उतरे तो भाजपा ने प्रत्याशी बदल दिया और इस बार अर्थशास्त्री महेन्द्र कुमार झाबक पर दावं खेला। लेकिन भाजपा का यह दावं फेल साबित हुआ और गहलोत दूसरी बार 18991 मतों से जीत गए।
तीसरा चुनाव : वर्ष 2008 में गहलोत के सामने भाजपा ने फिर रणनीति बदली। यहां इस बार जाति कार्ड खेला गया। यह सीट माली बाहुल्य मानी जाती है। इस सीट से अब तक चुनाव में माली समाज का प्रत्याशी ही जीतता रहा है। ऐसे में भाजपा ने भी माली प्रत्याशी के सामने माली समाज का उम्मीदवार ही उतरा। इस चुनाव में पूर्व मंत्री राजेन्द्र गहलोत को भाजपा का प्रत्याशी बनाया। लेकिन वे भी अशोक गहलोत के सामने टिक नहीं पाए और 15340 मतों से पराजित हो गए।
चौथा चुनाव : जीत की हैट्रिक लगा चुके और दो बार मुख्यमंत्री बनने के बाद वर्ष 2013 में गहलोत इसी सरदारपुरा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी बने। भाजपा ने फिर अपनी रणनीति बदली। इस बार राजपूत प्रत्याशी शंभूसिंह खेतासर को मैदान में उतारा गया। खेतासर वर्ष 2008 में ओसियां से निर्दलीय के रूप में विधानसभा व पाली लोकसभा क्षेत्र में बसपा की सीट से सांसद का चुनाव लड़ चुके थे। लेकिन दोनों बार ही हार का मुंह देखा। वर्ष 2013 में सरदारपुरा सीट से भाजपा ने खेतासर को अपना प्रत्याशी बनाया। इस चुनाव में मोदी की जबरदस्त लहर थी। कांग्रेस जिले की दस सीटों में से नौ सीट पर हार गई, लेकिन केवल गहलोत ही अपनी सरदारपुरा सीट बचा पाए। उन्होंने खेतासर को 18478 वोटों से पराजित किया।
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बड़ा सवाल : इस बार फिर कौन ?
सरदारपुरा को गहलोत की परम्परागत सीट माना जाता रहा है। लेकिन भाजपा ने हर बार प्रत्याशी बदला है। ऐेसे में इस चुनाव में कांग्रेस तो लगभग निश्चिंत हैं, भाजपा से दावेदार कौन? यह सवाल फिर से चुनावी हलचल में गूंजने लगा है। भाजपा भी ऐसे दावेदार की तलाश में है, जो मजबूती से गहलोत को टक्कर दे सके। हालंाकि भाजपा से इस सीट पर पांच-सात नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं। इनमें कुछ नाम तो वे हैं जो चुनाव लड़ चुके हैं, और कुछ नाम वर्तमान में अभी जिम्मेदार पदों पर हैं। देखना यह है कि भाजपा पुराने चेहरों पर दावं खेलेगी या कोई नया प्रत्याशी सामने लाएगी।