
जोधपुर. राज्य सरकार ने प्रदेश में बायोफ्यूल के लिए 57 व्यक्तियों/संस्थाओं को रिटेल लाइसेंस जारी किए हैं लेकिन इन लाइसेस की आड़ में कई रिटेलर्स व अन्य लोग बीच सडक़ पर खड़े होकर बायो फ्यूल बेच रहे हैं। और तो और इन्होंने वाहन चालकों को आकर्षित करने के लिए गाडिय़ों पर सरकारी बायोडीजल के बड़े-बड़े बैनर लगा रखे हैं, जबकि सरकार किसी प्रकार का उत्पादन अथवा बिक्री नहीं कर रही है। जोधपुर में मंडोर गार्डन, नेतड़ा टोल पंप, बनाड़, मथानियां फांटा, डीपीएस चौराहा, कायलाना चौराहा, शताब्दी सर्किल पर बायोफ्यूल के नाम पर बसों व ट्रकों को बीच में रोककर सडक़ पर फ्यूल भर रहे हैं, जबकि यह भी एक तरह हानिकारक पदार्थ है और इससे जान-माल की हानि हो सकती है।
वास्तव में बायोफ्यूल की बिक्री डीजल में मिलाकर करनी होती है। डीजल में यह 7 से 20 प्रतिशत तक मिलाया जाता है। बायोफ्यूल के रिटेलर अपने उत्पाद को ट्रांसपोर्टर्स व पेट्रोल पंप संचालकों को बेच सकते हैं ताकि वह डीजल में आनुपातिक मात्रा में इसको मिश्रित करके इसका उपयोग कर सकें। बायोफ्यूल रिटेलर को सीधे बीच सडक़ पर खड़े होकर हानिकारक ज्वलनीशील वस्तु बेचने का अधिकार नहीं है।
ट्रांसफॉर्मर ऑयल व सी-9 तेल
जांच में सामने आया है कि बीच सडक़ पर खड़े होकर बायोफ्यूल के नाम पर बेचे जा रहे इस तेल ट्रासंफार्मर ऑयल और सी-9 ऑयल है जो गुजरात से मंगाया जा रहा है। यूरो-3 और यूरो-4 की पुरानी गाडिय़ां इस इंजन में संचालित हो जाती है। सस्ता होने के कारण ट्रक चालक और प्राइवेट बसों के चालक अपनी गाडिय़ों में इसे भरवा रहे हैं।
वाहन चालक गाड़ी में रख रहे हैं अतिरिक्त पंप
बसें ऑयल और ट्रांसफॉर्मर ऑयल के लंबे इस्तेमाल से गाडिय़ों के इंजन के पंप खराब हो जाते हैं। ऐसे में ट्रक और प्राइवेट बसों के चालक अब अपनी गाडिय़ों में अतिरिक्त पंप रखने लग गए हैं। यह पंप 20 से 25 हजार रुपए का आता है। लंबे समय तक नकली डीजल इंजन में जाने से इंजन के पूरे खराब होने का खतरा है। इससे बड़े ट्रांसपोर्टरों को सीधा नुकसान होगा।