
gajendra dahiya/जोधपुर. बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना वाली कहावत उस समय चरितार्थ हो गई, जब जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय शिक्षक भर्ती घोटाले से सम्बंधित मामले में विवि का पक्ष रखने पूर्व कुलपति डॉ. रामपालसिंह दिल्ली स्थित राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के दफ्तर पहुंच गए। डॉ. सिंह के कुलपति पद पर नहीं होने की जानकारी पर आयोग न सिर्फ खफा हो गया, बल्कि विवि के रजिस्ट्रार डॉ. प्रदीपकुमार शर्मा को फटकारा और रोस्टर कमेटी सदस्य डॉ. रवि सक्सेना व एक अधिवक्ता को बैठक से बाहर निकाल दिया। आयोग अध्यक्ष प्रो. कृपाशंकर कठेरिया ने उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के नहीं आने पर भी नाराजगी जताई और राज्य सरकार को नोटिस देकर 15 दिन के भीतर जेएनवीयू का रोस्टर तैयार करने के लिए कमेटी बनाने के निर्देश दिए हैं।
विशेष बात यह है कि कार्यवाहक कुलपति डॉ. राधेश्याम शर्मा को जानकारी नहीं है कि विवि रजिस्ट्रार व शिक्षक विवि का पक्ष रखने दिल्ली गए हुए हैं। जेएनवीयू शिक्षक भर्ती संघर्ष समिति की ओर से विवि के सामान्य संकाय के शिक्षक भर्ती में रोस्टर में गड़बड़ी को लेकर एससी आयोग में शिकायत की थी। इस पर आयोग ने 20 मार्च को तत्कालीन कुलपति डॉ. सिंह को तलब किया था। डॉ. सिंह पेश नहीं हुए तो आयोग ने विवि प्रशासन के साथ राज्य सरकार को भी पार्टी बना 29 मई को पेश होने का नोटिस जारी किया था। इसकी पालना में डॉ. सिंह मंगलवार दोपहर आयोग के समक्ष पेश हो गए। जेएनवीयू शिक्षक भर्ती संघर्ष समिति की ओर से अध्यक्ष ओमप्रकाश भाटी और सचिव देवेंद्रकुमार सोलंकी ने पक्ष रखा। आए दिन जेएनवीयू में होने वाले मामलों को लेकर विवि की साख पर बट्टा लग रहा है।
मेरी जानकारी में नहीं
दिल्ली में किसकी पेशी थी, कौन गया। मेरी जानकारी में नहीं है। मुझे एससी आयोग के नोटिस के बारे में नहीं बताया गया।
डॉ. राधेश्याम शर्मा, कार्यवाहक कुलपति, जेएनवीयू, जोधपुर