जोधपुर

सात साल से राजस्थान सरकार की क्यों ‘मेहमान’ बनी हुई है सीबीआइ

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Aug 05, 2018
cbi

जोधपुर.

राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचाने वाले बहुचर्चित भंवरीदेवी अपहरण एवं हत्याकांड मामले की जांच करने वाली केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो की टीम पिछले सात साल से राज्य सरकार की मेहमान है। टीम को जब जांच दी गई तो जोधपुर सर्किट हाउस में दो कमरे दिए गए थे। इन्हें ही कार्यालय एवं निवास के तौर पर उपयोग किया जाता रहा। अब इस प्रकरण में चालान पेश हो चुका है और ट्रायल चल रहा है।

मेहमान बने हुए पूरे सात साल हो गए
भंवरीदेवी अपहरण और हत्याकांड के बाद पूरे देश में जोधपुर चर्चा में आ गया था। इस मामले की जांच सीबीआइ नई दिल्ली की टीम को दे दी गई। कांग्रेस सरकार के तत्कालीन मंत्री महिपाल मदेरणा और विधायक मलखान सिंह सहित अन्य गिरफ्तार हुए। अगस्त 2011 में टीम जोधपुर आई और जांच शुरू की। राज्य की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इस टीम को सुविधाएं देने के लिए कार्यालय मय निवास के लिए सर्किट हाउस के दो कमरे दिए थे। इसका पूरा खर्च राज्य सरकार स्वयं ही वहन करती है। अब अगस्त में इस टीम को यहां मेहमान बने हुए पूरे सात साल हो गए।

चालान पेश, फिर भी मेहमान है टीम
मामले में सीबीआइ की ओर से न्यायालय में चालान पेश किया जा चुका है। सात साल की जांच के बाद टीम अब भी राज्य सरकार की मेहमान है। हालांकि टीम को वर्तमान में दिए गए कमरा संख्या 37 व 38 अधिकांश समय खाली ही रहते हैं, लेकिन वे और किसी को नहीं दिए जाते। टीम के सदस्य कभी-कभार न्यायिक कार्य से यहां आते हैं तो ठहरते हैं। बताया जाता है कि केस से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य या कागजात इसमें रखे हैं। ट्रायल के दौरान जिन साक्ष्यों या दस्तावेजों की आवश्यकता होती है उनको यहां संरक्षित रखा गया है।

सर्किट हाउस जोधपुर के प्रबंधक जितेंद्र सिंह बताते है कि सीबीआइ टीम को दो कमरे दे रखे हैं। यह पिछली सरकार के समय से ही है। इन कमरों का किराया खर्च राज्य सरकार ही वहन करती है। ऐसा जयपुर से आदेश है। सीबीआइ नई दिल्ली के जनसम्पर्क अधिकारी आर के गौड़ बताते हैं कि कोई भी राज्य सरकार जब हमें किसी मामले की जांच देती है तो हमें यह सुविधाएं उपलब्ध करवाती है। स्थानीय स्तर पर हमें पुलिस व प्रशासन का सहयोग भी लेना होता है।

Published on:
05 Aug 2018 03:17 am