
विकास चौधरी/जोधपुर. फायरिंग से दहशत फैलाने के मामले में पंजाब के गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की गैंग पकडऩे के बाद जिले का हार्डकोर बदमाश कैलाश मांजू पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती था। खुद के बेगुनाह होने के वीडियो वायरल कर अधिकारियों की आंखों की किरकिरी बने मांजू को पकडऩे के लिए जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट ने ढाई साल तक पूरी ताकत झोंक कई शहरों में छापे मारे थे। नवम्बर में पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पहुंचने पर ग्रामीण पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ा था। चुनाव प्रक्रिया समाप्ति के बाद गत दिनों पुलिस ने उसे जेल से गिरफ्तार तो किया, लेकिन सिर्फ पांच दिन में पांच मामलों में गिरफ्तार कर फिर से जेल भिजवा दिया। जोधपुर जिला ग्रामीण व कमिश्नरेट पुलिस आठ मामलों में एक मोबाइल तक बरामद नहीं कर पाई। जबकि पुलिस का दावा था कि उसने इंटरनेट कॉलिंग से गैंग संचालित कर फायरिंग करवाई थी।
सिर्फ एक मामले में रिमाण्ड
लाखों रुपए लेन-देन के मामले में हार्डकोर हिस्ट्रीशीटर कैलाश मांजू ने गत वर्ष हिस्ट्रीशीटर दिनेश बम्बानी के श्रीराम नगर स्थित मकान पर गोलियां चलवाईं थी। चौहाबो थाना पुलिस ने उसे जेल से प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया था। मोबाइल बरामदगी के लिए उसे दो बार रिमाण्ड पर लिया, लेकिन मोबाइल बरामद नहीं किया जा सका। बालेसर थाना पुलिस ने भी तीन मामलों में गिरफ्तार रिमाण्ड लिया था और एक कार जब्त की थी।
पैंडेंसी निपटाने के लिए जांच के नाम पर खानापूर्ति!
वर्ष 2018 समाप्ति पर है। ऐसे में राज्यभर की पुलिस के साथ जोधपुर पुलिस भी लम्बित मामले निपटाने में लगी हुई है। संभवत: यही वजह है कि हार्डकोर मांजू को पांच दिन में पांच मामलों में गिरफ्तार कर हाथों-हाथ न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया।
25 दिसम्बर को गिरफ्तार, 29 को अजमेर जेल भेजा
- 25 दिसम्बर को प्रतापनगर थाना पुलिस ने गत वर्ष चिकित्सक के मकान पर फायरिंग के मामले में गिरफ्तार किया और दूसरे ही दिन न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया।
- 26 दिसम्बर को शास्त्रीनगर थाना पुलिस ने दिनेश बम्बानी पर गोली चलवाने के आरोप में गिरफ्तार किया और दूसरे ही दिन जेल भेज दिया।
- ट्रेवल्स मालिक के ऑफिस व मकान पर फायरिंग के दो मामलों में शास्त्रीनगर थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
- वर्ष 2015 में रिश्तेदार श्यामलाल विश्नोई की मोटरसाइकिल को टक्कर मारने के मामले में झंवर थाना पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर शनिवार को न्यायिक अभिरक्षा में भिजवाया था। जिसे अजमेर की घूघरा घाटी स्थित हाइ सिक्योरिटी जेल भेज दिया गया।
इनका कहना है
‘शुरुआती मामले में गिरफ्तारी के बाद कैलाश मांजू का रिमाण्ड लिया गया था। तब पूछताछ कर ली गई थी। अन्य मामलों में बरामदगी न होने और आवश्यकता न होने पर रिमाण्ड नहीं लिया गया। उसे अजमेर जेल भेज दिया गया है।’
मोनिका सेन, पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) जोधपुर