
जोधपुर. केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत खुद के खिलाफ जोधपुर की एक अदालत में चल रहे फौजदारी मामले में गुरुवार को उपस्थित नहीं हो पाए। उनके अधिवक्ता नाथुसिंह राठौड़ की ओर से एक हाजिरी माफी पेश की, जिसे न्यायालय ने स्वीकार करते हुए अगली तारीख पेशी पर उपस्थित होने के निर्देश दिए। इस मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी और इसी दिन केंद्रीय मंत्री को आरोप सुनाए जाएंगे।
30 अप्रैल से जमानत पर हैं केंद्रीय मंत्री
महानगर मजिस्ट्रेट संख्या-आठ की पीठासीन अधिकारी वैदेहीसिंह चौहान ने केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत की 14 वर्ष पुराने इस मामले में गत 30 अप्रैल को जमानत स्वीकार कर ली थी, मंत्री तभी से जमानत पर है। कोर्ट ने शेखावत को दस हजार रुपए के निजी मुचलके तथा इतने की ही जमानत देने का आदेश पर जमानत दी थी।
यह है मामला
वर्ष 2004 में शेखावत ने शास्त्रीनगर पुलिस थाने में एक एफआईआर दर्ज करवाई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि उनके शैक्षणिक संस्थान के कार्यालय में समर्थ तिवारी नाम के व्यक्ति ने शराब पीकर तोडफ़ोड़़ की तथा उत्पात मचाया। समर्थ तिवारी जोधपुर में पदस्थापित तत्कालीन पुलिस अधिकारी सत्यमणी तिवारी का पुत्र है। पुलिस ने जांच के बाद घटनास्थल, गवाह तथा सबूत के आधार पर मामला संदिग्ध मानते हुए न्यायालय में एफआर प्रस्तुत कर दी। इसके बाद पुलिस ने झूठी एफआईआर लिखवाने पर शेखावत के खिलाफ न्यायालय में इस्तगासा पेश कर दिया। शेखावत के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 182 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ। विचारण के दौरान शेखावत उपस्थित नहीं हुए। कोर्ट ने कई बार समन जारी किया। आखिर फरवरी 2018 में शेखावत के समन तामील हो पाए थे। उल्लेखनीय है कि भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री शेखावत जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में वर्ष 1992 में एबीवीपी के बैनर तले छात्रसंघ अध्यक्ष भी चुने गए थे।
हो सकती है 6 माह की सजा
आईपीसी की धारा 182 के तहत अपराध साबित होने पर आरोपी को 6 माह का साधारण कारावास तथा एक हजार रुपए जुर्माने की सजा का प्रावधान है। कानून विशेषज्ञों के अनुसार हालांकि यह जमानती तथा गैर संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है फिर भी यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है। इसलिए मंत्री के सामने मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।