जोधपुर

High Court – हाईकोर्ट ने गर्भधारण के लिए पति की पैरोल की मंजूर

High Court - राजस्थान हाईकोर्ट ने दिया महत्वपूर्ण फैसला
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Apr 08, 2022
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High Court - राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए एक बंदी को पंद्रह दिन की सशर्त पैरोल देने के आदेश दिए हैं, जिसकी पत्नी ने गर्भधारण करने के लिए याचिका लगाई थी।

न्यायाधीश संदीप मेहता और न्यायाधीश फरजंद अली की खंडपीठ में एक पत्नी ने पैरोल पर पति के रिहाई की याचिका दायर की थी। खंडपीठ ने कहा-हालांकि राजस्थान कैदी रिहाई पर पैरोल नियम, 2021 में कैदी को उसकी पत्नी के संतान होने के आधार पर पैरोल पर रिहा करने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है; फिर भी धार्मिक दर्शन, सांस्कृतिक, सामाजिक और मानवीय पहलुओं पर विचार करते हुए, भारत के संविधान द्वारा गारंटीकृत मौलिक अधिकार के साथ और इसमें निहित असाधारण शक्ति का प्रयोग करते हुए, यह कोर्ट याचिका को स्वीकार करता है।

न्यायाधीश अली ने कहा-अगर हम मामले को धार्मिक पहलू से देखें तो हिंदू दर्शन के अनुसार, गर्भधान, यानी गर्भ का धन प्राप्त करना 16 संस्कारों में से पहला है। विद्वानों ने वैदिक भजनों के लिए गर्भधान संस्कार का पता लगाया है, जैसे कि ऋग्वेद के अनुसार संतान और समृद्धि के लिए बार-बार प्रार्थना की जाती है। यहूदी धर्म, ईसाई धर्म और कुछ अन्य अब्राहमिक धर्मों में जनन को ईश्वरीय आदेश कहा गया है।आदम और हव्वा को सांस्कृतिक जनादेश दिया गया था। इस्लामी शरिया और इस्लाम में वंश के संरक्षण का कहा गया है। अली ने आगे संतान के अधिकार और वंश के संरक्षण के समाजशास्त्रीय और संवैधानिक पहलू का विवेचन भी किया।

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए एक बंदी को पंद्रह दिन की सशर्त पैरोल देने के आदेश दिए हैं, जिसकी पत्नी ने गर्भधारण करने के लिए याचिका लगाई थी।

Updated on:
08 Apr 2022 04:30 pm
Published on:
08 Apr 2022 04:30 pm