
अविनाश केवलिया
जोधपुर। वाटर चार्जेज में छूट देने वाला दिल्ली के बाद राजस्थान दूसरा प्रदेश बना है। शहरों के साथ गांवों की आबादी को भी एक सीमा तक पानी के बिल में छूट दी गई है। लेकिन खास बात यह है कि शहरी क्षेत्रों में पानी के मीटर ही खराब है। दो साल का टारगेट हैं इन मीटर को शुरू करने और फिर गणना करने का। लेकिन खास बात यह है कि मीटर यदि शुरू भी हो जाते हैं तो जलदाय विभाग के पास घरों में जाकर रीडिंग लेने वाले कर्मचारी ही नही हैं।
मुख्यमंत्री ने जोधपुर से जो पूरे प्रदेश के लिए घोषणा की उससे प्रदेश के 3.36 करोड़ लोगों के लाभांवित होने के दावे किए जा रहे हैं। शहरों में 56 लाख लोगों को यह फायदा दिया जाना है। लेकिन खास बात यह है कि शहरों में आधे से ज्यादा पानी के मीटर काम नहीं कर रहे हैं। गांवों में तो मीटर रीडिंग जैसी कोई व्यवस्था सालों से काम ही नहीं कर रही है। पिछले साल तकनीकी पदों के लिए 12 सौ नौकरियां निकाली थी। लेकिन वह प्रक्रिया भी अभी पूरी नहीं हुई है। 1985 के बाद न तो नए पद स्वीकृत हुए और न ही भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई।
यह है प्रदेश की स्थिति
- 1985 में प्रदेश में जो पद स्वीकृत थे आज भी वही ढांचा चला आ रहा है।
- 338 पद मीटर रीडर के स्वीकृत हैं।
- 200 से भी कम मीटर रीडर कार्यरत हैं।
- 1200 से अधिक कर्मचारियों की आवश्यकता है।
- 144 मीटर निरीक्षक के पद स्वीकृत हैं।
- 75 के करीब ही कार्यरत है।
- 200 से अधिक निरीक्षकों की आवश्यकता है।
(जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की ओर से वित्त विभाग को कुछ साल पहले अनुमोदन के लिए भेजी रिपोर्ट के आधार पर)
यह है सरकार की घोषणा
- 15 हजार लीटर तक उपभोग करने वाले शहरी उपभोक्ता के वाटर चार्जेज नहीं लगेंगे।
- 40 एलपीसीडी पानी का उपभोग करने वाले ग्रामीण उपभोक्ता के वाटर चार्जेज नहीं लगेंगे।
इनका कहना...
जो मीटर बंद है उन्हे बदलने के लिए अभियान चलाने की सरकार ने घोषणा की है। मीटर रीडर पद के लिए सरकार कोई व्यवस्था करेगी। नई भर्तियों के साथ हो सकता है ठेका प्रथा भी लागू करे।
- जयसिंह चौधरी, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग जोधपुर।
बंद मीटर को शुरू करना एक चुनौती रहेगी। सालों से भर्तियां हुई नहीं है। ऐसे में मीटर की रीडिंग लेने वाले भी नहीं है। कई सालों से कर्मचारी संघ इसकी मांग कर रहे हैं।
- रामदयाल परिहार, प्रदेश मंत्री, राजस्थान जलदाय कर्मचारी महासंघ।