
गजेन्द्र सिंह दहिया/जोधपुर. केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के नेशनल मिशन ऑन इंटरडिसिप्लीनरी साइबर फिजिकल सिस्टम के अंतर्गत भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर का चयन टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब (टीआईबी) के रूप में किया गया है। यहां कम्प्यूटर विजन व वर्चुअल वल्र्ड का हब बनेगा, जिसके लिए 115 करोड़ रुपए दिए गए हैं। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) की मदद से आइआइटी जोधपुर देश के विभिन्न तकनीकी, वैज्ञानिक व औद्योगिकी संस्थानों के साथ एमओयू करके नई तकनीक विकसित करेगा। देश में 18 टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब और 7 सेक्टोरल एप्लीकेशन हब खोले जाने हैं ताकि साइबर क्षेत्र में देश में नई तकनीक व एप्लीकेशन विकसित की जा सके।
रक्षा क्षेत्र में पहल करेगा जोधपुर
आइआइटी जोधपुर रक्षा क्षेत्र में काम करने के लिए देश के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की देशभर में फैली 6 रक्षा प्रयोगशाला के साथ वार्ता कर रहा है। एमओयू होने पर आइआइटी जोधपुर में डीआरडीओ का एक्सीलेंस सेंटर बनेगा। भविष्य में यहां आर्मी, एयरफोर्स व नेवी के लिए एआई आधारित तकनीक विकसित की जाएगी। आने वाले समय में रक्षा क्षेत्र में एआई की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन व बड़े हथियारों को बगैर मानव के ऑपरेट किए जाने पर रिसर्च की संभावना है।
फायरिंग रेंज में नहीं जाना पड़ेगा
सूत्रों के मुताबिक वर्चुअल तकनीक की सहायता से सेना को प्रशिक्षण भी बगैर रियल फील्ड में भेजे दिया जा सकेगा। इसके बाद सभी सैनिकों को फायरिंग रेंज में जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी। वर्तमान में जैसलमेर पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज और बीकानेर स्थित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में प्रशिक्षण के लिए हर साल बड़ी संख्या में सैनिकों का मूवमेंट होता है। स्क्रेप्स के कारण कुछ स्थानीय लोग भी कई बार मारे जाते हैं। साथ ही आसपास के गांव के निवासियों को भी परेशानी होती है।
लड़ाकू विमान का सिम्यूलेशन भी
लड़ाकू विमान के पायलट्स को भी प्राथमिक प्रशिक्षण प्रयोगशाला में ही मिलने की उम्मीद है। इसके लिए मिग-21, मिग-27, सुखोई-30 और हाल ही में आए रफाल लड़ाकू विमान के सिम्यूलेशन बनाए जाएंगे। इससे ईंधन व मानव जान दोनों को फायदा मिलेगा। अपाचे, चिनूक, रुद्र जैसे हेलीकॉप्टर का प्रशिक्षण भी वर्चुअल वल्र्ड में दिया जा सकेगा।
..........................
‘आइआइटी जोधपुर को शुरू हुए अब 12 साल हो गए हैं। अब हमारा ध्यान रक्षा क्षेत्र की ओर है। हम डीआरडीओ की 6 प्रयोगशाला के साथ मिलकर अनुसंधान करने पर बातचीत कर रहे हैं।’
प्रो शांतनु चौधरी, निदेशक, आइआइटी जोधपुर