जोधपुर

शहर में बढ़ रहे अवैध निर्माण, मगर रोकने वाले नहीं

- जेडीए का प्रवर्तन दस्ता सालों से नहीं बढ़ा - औसतन कार्रवाई सिर्फ काम रुकवाने तक हो जाती है सीमित
2 min read
Aug 08, 2018
illegal construction,jodhpur news,jda jodhpur,
- औसतन कार्रवाई सिर्फ काम रुकवाने तक हो जाती है सीमित

केस 1
चौखा क्षेत्र में जोधपुर विकास प्राधिकरण की योजना के समीप ही अवैध निर्माण कर लिया गया। लम्बे समय तक तो इसकी जानकारी ही नहीं मिली। अभी दो दिन पहले ही यहां जेडीए टीम ने कार्रवाई की।


केस 2 डिगाड़ी क्षेत्र और नान्दड़ी बनाड़ रोड पर अवैध रूप से दुकानों का निर्माण किया जा रहा था। इसी प्रकार प्रेम नगर में भी एेसे ही अवैध निर्माण हुए। जेडीए की टीम पहुंची और काम रुकवा कर औजार ले आई।


केस 3

झालामंड क्षेत्र में पुरानी पाली रोड पर अवैध दुकानों व भवनों के निर्माण की शिकायत लम्बे समय से मिल रही थी। झालामंड से गुढ़ा गांव की ओर जाने वाले मार्ग पर भी छप्पर लगाकर अवैध निर्माण की शिकायतें मिल रही थी। यह निर्माण भी जेडीए टीम ने रुकवाए।


जोधपुर.

शहर विस्तार के साथ अवैध निर्माण और अतिक्रमण की यह कुछ शिकायतें पिछले एक माह में जेडीए को मिली है, जिन पर टीम ने कार्रवाई की है। लेकिन इसके अलावा दर्जनों एेसे मामले हैं जो कि जेडीए तक पहुंच ही नहीं पाते हैं। इधर, अतिक्रमण निरोधक दस्ते को मजबूत करने की बजाय जेडीए प्रशासन कमजोर करने में ही लगा है।
जोधपुर विकास प्राधिकरण में जोन के लिहाज से उपायुक्त और पूरी टीम बांटी हुई है। इसी लिहाज से तहसीलदार, पटवारी और कार्मिक भी है। लेकिन शहर के विस्तार को देखते हुए प्रवर्तन शाखा काफी कमजोर है। न तो प्रत्येक जोन-वार प्रर्वतन अधिकारी है और न ही निरीक्षक। बची हुई कसर तो खुद जेडीए प्रशासन ही निकाल रहा है जो इस शाखा में लगे हुए कर्मचारियों को भी अन्यत्र लगा कर इसे पूरी तरह कमजोर करने में लगा है।
हर माह में 50 से अधिक शिकायतें
जेडीए क्षेत्र में एक माह में औसतन 50 से अधिक शिकायतें अवैध निर्माण और अतिक्रमण के रूप में प्राप्त होती है। लेकिन कार्मिकों की कमी के कारण कार्रवाई महज ८-१० शिकायतों पर ही हो पाती है। इनमें भी एक या दो पर ही निर्माण ध्वस्त करने जैसी कार्रवाइयां होती है। अन्य अवैध निर्माण का काम रुकवा कर औजार जब्त कर इतिश्री कर ली जाती है। काम रुकवाने में भी पूर्व जोन सबसे आगे है।
यह है स्थिति
एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नियुक्त है। इनके पास टीम के नाम पर सहायक प्रवर्तन अधिकारी ही है। चार जोन है। लेकिन प्रर्वतन निरीक्षक सिर्फ दो है। प्रर्वतन शाखा में कर्मचारी भी एक ही नियुक्त है। इसके अलावा सुरक्षाकर्मियों की आवश्यकता होती है। होमगार्ड के जवान ले जाते हैं। जब किसी बड़ी कार्रवाई को अंजाम देना होता है तो संबंधित थाने से इमदाद मांगी जाती है।
जयपुर जेडीए जैसी व्यवस्था हो तो रुके अवैध निर्माण
जयपुर जेडीए में अवैध निर्माण रोकने के लिए आईपीएस लेवल के अधिकारी। इसके बाद अतिरिक्त अधीक्षक, उपाधीक्षक और सर्किल इंस्पेक्टर के साथ पुलिस का पूरा जाप्ता उपलब्ध है। जोनवार प्रवर्तन अधिकारी व उनके साथ भी पूरी टीम मुहैया करवाई जाती है।
न्यास से प्राधिकरण बना तो किया प्रावधान
नगर सुधार न्यास से प्राधिकरण में क्रमोन्नत होने पर नगरीय निकाय को सुविधाएं देने के दावे किए थे। प्रवर्तन यानि कि अतिक्रमण निरोधक दस्ते को मजबूत करने और प्राधिकरण स्तर पर जयपुर की तर्ज पर ही सुविधाएं देने का प्रावधान किया गया था।

Published on:
08 Aug 2018 08:15 pm