
जोधपुर ( jodhpur news rajasthan news) .सेल्फ डिफेंस ट्रेनर ( self defense trainer ) और ब्लैक बेल्ट ( black belt ) मार्शल आर्ट ( martial arts ) इंस्ट्रक्टर ( instructor ) निरमा पटेल का कहना है कि आत्मरक्षा का टॉपिक शिक्षा प्रणाली में शामिल होना चाहिए। उन्होंने वीमन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी के संबंध में पत्रिका से एक मुलाकात में यह बात कही। उन्होंने कहा कि स्कूल या कॉलेज सभी जगह लड़कियों के लिए परमानेन्ट सेल्फ डिफेंस ( self defense ) का पाठ्यक्रम होना चाहिए, ताकि हम हर लडक़ी ( Girls safety ) और महिला को सेल्फ डिफेंस से अवगत करवा सकें।
पटेल ने कहा कि जैसे हर लडक़ी और महिला आज के समय में खुद को फि ट रखना चाहती है तो उसके साथ-साथ उसे खुद अपनी सुरक्षा को लेकर भी थोड़ा जागरुक रहना जरूरी है। इसके लिए वे सेल्फ डिफेंस की रेगुलर क्लासेज जॉइन कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि आजकल का माहौल हम सभी लोग जानते हैं कि महिलाएं और बच्चियां दोनों ही सुरक्षित नहीं हैं। इसलिए समय-समय पर आत्मरक्षा जागरूकता कैम्प लगना जरूरी है, लेकिन मैंने देखा है कि आज भी लोग आत्मरक्षा सीखने के बारे में जागरुक नहीं हैं। क्यों कि उन्हें लगता है कि आत्म रक्षा सीखने से क्या फायदा।
पटेल ने कहा कि यह मानसिकता इसलिए है। क्योंकि उन्हें आत्मरक्षा के बारे में सही जानकारी नहीं है। उनकी भ्रांति यह है कि आत्मरक्षा कोई टेक्नीक, कराटे या बॉक्सिंग है, मगर आत्मरक्षा तकनीक का अर्थ खुद को मुश्किल परिस्थितियों से बचा कर बाहर निकलना है। जबकि कराटे, बॉक्सिंग और बाकी मार्शल आट्र्स एक फाइटिंग खेल है, जिन्हें खेल के मैदान में खेला जाता है।
उन्होंने कहा कि सेल्फ डिफेंस रेग्युलर क्लासेज में कैसे चलना है? ट्रैवलिंग के समय किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? स्कूटी चलाते समय क्या ध्यान रखना है? अनजान व्यक्ति को कैसे हैंडल करना चाहिए? अपनी डेली यूज़ होने वाली चीज़ों को मुसीबत के समय कैसे हथियार बना कर खुद को बचाना चाहिए? नुकीली चीज़ों को कहां मारना चाहिए और व्यक्ति के कमजोर अंगों और मजबूत अंगों की सही जानकारी इस टेक्नीक से बताई जाती है।
पटेल ने कहा कि इसके माध्यम से वे खुद को मुसीबत के समय आसानी से बचकर निकल सकती है। कुछ बुरा होने के बाद जागने से अच्छा है कि पहले ही खुद को सक्षम बना लें,ताकि बाद में पछताना ना पड़े।