
जयकुमार भाटी/जोधपुर. दुनियाभर के खिलाडिय़ों को एक मंच पर इकठ्ठा कर विभिन्न खेलों में विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा करवाने वाले खेलों के महाकुंभ ओलंपिक के लिए आज का दिन बेहद खास है। लोगों को जीवन में खेलों के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए हर साल 23 जून को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक दिवस मनाया जाता है। ओलंपिक दिवस खेल, स्वास्थ्य और एक साथ होने का एक उत्सव है, जिसमें दुनिया भर से लोग शामिल होते हैं। ओलंपिक दिवस की पूर्व संध्या पर विभिन्न खेल के नेशनल खिलाडि़यों से पत्रिका की विशेष बात की गई। जिसमें खिलाडि़यों ने लॉकडाउन के दौरान की गई तैयारी व अनलॉक के बाद खेल मैदान में की गई वापसी के बारे में बताया।
बच्चों को ऑनलाइन सिखाया
ताइक्वांडो की नेशनल खिलाड़ी स्नेहा जाट ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान घर के पास बने गार्डन में प्रैक्टिस करने के साथ करीब चालीस बच्चों को ऑनलाइन सिखाने का कार्य भी किया गया। अब अनलॉक में ग्राउण्ड में बच्चों के साथ खुद की प्रैक्टिस में भी निखार आने लगेगा।
मैदान जीतनी तैयारी घर पर नहीं हो सकी
वुशु ताओलू के नेशनल खिलाड़ी नक्षत्र जांगिड ने बताया कि खेल मैदान में जितनी तैयारी कर सकते है, उतनी तैयारी घर पर नहीं हो सकती। एेसे में लॉकडाउन की तुलना में अनलॉक में तैयारी करने में ज्यादा फायदा हो रहा हैं।
घर के बाहर खेलना पड़ा
बैडमिंटन के खिलाड़ी पवन कुमार ने बताया कि ग्राउण्ड बंद होने पर घर के बाहर ही खेलने को मजबूर हो चुके थे। वहीं घर के बाहर साथ में खेलने के लिए बेहतर खिलाड़ी नहीं होने से खेल भी प्रभावित हुआ।
बंद हो गई प्रैक्टिस
साइकिलिंग खिलाड़ी पीयूष चौधरी ने बताया कि ये एेसा खेल है जिसमें साइकिलिंग के लिए पर्याप्त जगह चाहिए। जो घर की छत पर नहीं हो सकता। एेसे में लॉकडाउन में बंद हुई प्रैक्टिस को अनलॉक के बाद फिर से करने का मौका मिला हैं।
बिना साथी प्रैक्टिस अधूरी
वुशू की राष्ट्रीय पदक खिलाड़ी मंजू चौधरी व कौशल्या पटेल ने बताया कि वुशू एेसा खेल है, जिसमें साथी की आवश्यकता होती हैं। बिना साथी घर पर प्रैक्टिस तो की गई, लेकिन खेल में निखार तो ग्राउण्ड में साथी के साथ ही आने लगा हैं।
छत पर प्रैक्टिस
बॉक्सिंग खिलाड़ी मुकुंद आचार्य ने बताया कि लॉकडाउन में अपनी घर की छत पर निरंतर तैयारी की गई। अब ग्राउण्ड में साथी खिलाडि़यों के साथ खेलने में मजा आ रहा हैं।
रूके पैर फिर चलने लगे
स्केटिंग खिलाड़ी लव व कुश ने बताया कि लॉकडाउन में घर की छत पर ज्यादा प्रैक्टिस नहीं कर पा रहे थे। अब ग्राउण्ड में ज्यादा दूरी तक प्रैक्टिस करने से मानों रूके पैर फिर चलने लगे हैं।
रेसलिंग के लिए मैदान ही जरूरी
रेसलर निखिल खत्री ने बताया कि लॉकडाउन में अकेले प्रैक्टिस करने से खेल प्रभावित होने लगा। रेसलिंग के लिए तो मैदान बहुत जरूरी हैं। अब अनलॉक के बाद साथियों के साथ प्रैक्टिस करना शुरू करने से खेल में वापस सुधार होगा और प्रतियोगिता के लिए लक्ष्य निर्धारित करने में मदद मिलेगी।