
जोधपुर. जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों ने करीब 2 साल पहले विवि में कार्यरत 100 से अधिक ठेका कर्मियों को अनुभव प्रमाण पत्र बांट दिए थे। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से विवि का अनुदान रोकने और बार-बार कार्रवाई के निर्देश देने के बावजूद धरातल पर कुछ नजर नहीं आने पर अब मुख्यमंत्री कार्यालय ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब तलब किया है।
जेएनवीयू के तत्कालीन कार्यवाहक रजिस्ट्रार व रसायन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ प्रदीप शर्मा ने अपने यहां कार्यरत एक ठेका कर्मी को 25 साल का अनुभव प्रमाण पत्र देने के बाद विश्वविद्यालय के अन्य विभागाध्यक्ष और डीन-डायरेक्टर्स ने ठेका कर्मियों को अनुभव प्रमाण पत्र बांटे। हाईकोर्ट के निर्देश पर विवि ने तीन ठेका कर्मियों को नौकरी भी ज्वाइन करा दी। राज्य सरकार के पास मामला पहुंचने पर उसने विवि की ग्रांट रोक ली और ग्रांट जारी करने की एवज में अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने वाले संबंधित शिक्षकों के विरुद्ध कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे।
सहायक कुलसचिव की शिकायत पर अब जांच
विवि के एकेडमी शाखा के तत्कालीन सहायक कुलसचिव ऋषिराज गांधी ने मुख्यमंत्री और गवर्नर को पत्र लिखकर स्वयं की शाखा में दो ठेका कर्मियों को बगैर उनकी जानकारी के सील लगाकर अन्य कर्मचारी द्वारा फर्जी साइन करके अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने की शिकायत की। मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव जुगल किशोर मीणा ने मामले में जेएनवीयू को पत्र लिखकर जांच करने को कहा है।
राज्य सरकार को धोखा
राज्य सरकार और जेएनवीयू के मध्य हुए एमओयू के अंतर्गत विवि को किसी भी तरह के वित्तीय मामले में सरकार की मंजूरी लेनी आवश्यक है, लेकिन विवि ने राज्य सरकार को पूछे ठेकाकर्मियों को नौकरी दी और अब अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने वाले शिक्षकों को केवल नोटिस देकर खानापूर्ति कर रहा है।