
जोधपुर. कोरोना की महामारी के दौर में सरकार क्वारंटीन सेंटर्स में रहने वाले लोगों पर तो प्रति व्यक्ति अनुमानत: दो से ढाई हजार रुपए प्रतिदिन खर्च कर रही है, लेकिन यदि ऐसी ही उदारता होटल इंडस्ट्री पर दिखाए तो जीवनदान मिल सकता है। शहर में करीब 20 होटल का उपयोग चिकित्सा स्टाफ के ठहराव स्थल के रूप में हो रहा है।
आगामी समय होटल इंडस्ट्री के लिए काफी मुश्किल है। पर्यटन उद्योग बुरी तरह से प्रभावित होगा। ऐसे में शहर की 300 से अधिक होटल व गेस्ट हाउस पर संकट खड़ा है। लेकिन फिलहाल चुनिंदा होटल्स को मेडिकल स्टाफ को ठहराने के रूप में उपयोग किया जा रहा है। इन होटल्स को प्रशासन चाहे तो पूर्ण सुविधा के साथ उपयोग कर इनको जीवनदान रूपी राशि दे सकता है। कई शहरों में इसके लिए प्रयास हुए हैं। अब नजरें जोधुपर जिला प्रशासन की ओर है।
बनी है कमेटी
जिला प्रशासन की ओर से इस संबंध में एक कमेटी बनी है। जिसकी एक बैठक भी हो चुकी है। एडीएम तृतीय अंजुम ताहिर ने बताया कि ऐसी होटल्स व भवनों के पिछले बिजली व अन्य खर्च का लेखा-जोखा लिया गया है। अब इस आधार पर इनको भुगतान दर तय की जाएगी।
कई समाज ने स्वैच्छा से दिए भवन
जोधपुर शहर में करीब 5 से ज्यादा तीन सितारा होटल वॉरियर्स को ठहराने के काम आ रही है। इसके अलावा कुछ धर्मशाला है। वहीं कई समाज के भवन भी स्वैच्छा से दिए गए हैं।
सरकार कुछ राहत दे
आगामी समय होटल इंडस्ट्री के लिए काफी मुश्किल भरा है। शहर की कई बेहतरीन होटल्स प्रशासन को उपयोग के लिए दी गई है। यदि अच्छी राशि दी जाए तो इस इंडस्ट्री को भी कुछ राहत मिलेगी।
- जे.एम. बूब, अध्यक्ष, जोणणा होटल्स एंड रेस्टोरेंट सोसायटी