
अविनाश केवलिया. जोधपुर.
हमारे शहर के दो प्रमुख जलाशय कायलाना-तख्तसागर जो कि बारिश के दिनों में भी नहीं भरते उनको जलदाय विभाग और शहर की जनता के धैर्य ने बूंद-बूंद कर भर दिया है। कई सालों बाद ये जलाशय 90 प्रतिशत तक भरे हैं। ऐसा संभव हुआ है पिछले 18 माह से हर पखवाड़े लिए जाने वाले शटडाउन के कारण।
2018 में डेढ़ माह के क्लोजर अब इंदिरा गांधी नहर में पानी छोड़ा तो उसके बाद से ही बड़े क्लोजर की तैयारियां शुरू हो गई। 2019 में 70 दिन का क्लोजर प्रस्तावित था, लेकिन वह टल गया। इसके बाद अब 2020 में यही सबसे बड़ा क्लोजर प्रस्तावित है। खास बात यह है कि इस क्लोजर के लिए ज्यादा से ज्यादा दिनों का पानी जलाशयों में स्टोर करना है। इसी कारण पिछले 18 माह से हर 15 दिन में एक बार 24 घंटे का शटडाउन लिया जा रहा है, इसी का परिणाम है कि ये जलाशय अपनी क्षमता का 90 प्रतिशत तक भर चुके हैं। अभी डेढ़ माह में इनका लेवल और ऊपर जाने की संभावना है।
फैक्ट फाइल
- 18 माह से माह में दो बार शटडाउन
- 1 शटडाउन में करीब 12 एमसीएफटी पानी बचता है।
- 12 एमसीएफटी के करीब एक दिन की पेयजल सप्लाई है शहर की।
हमारे जलाशयों की स्थिति
- 61 फीट है कुल गेज
- 56.5 फीट हो चुका गेज
- 360 एमसीएफटी दोनों जलाशयों की कुल क्षमता
- 322 एमसीएफटी पानी अब तक संचित हो चुका है।
बारिश में भी नहीं आया था इतना पानी
दोनों जलाशयों के कैचमेंट क्षेत्र में खनन और अतिक्रमण होने के कारण इस बार अच्छी बारिश होने के बावजूद इतना पानी नहीं आया जितना हमारे शहर के कटौती कर जमा कर लिया है। मानसून सीजन में 60 एमसीएफटी पानी ही जमा हो पाया था।
20 दिन पानी पिला सकते हैं जलाशय
हमारे शहर की एक दिन की पेयजल सप्लाई की खपत करीब 12-13 एमसीएफटी है। कायलाना-तख्तसागर में कुल 360 एमसीएफटी पानी संचित हो सकता है। इनमें से 100 एमसीएफटी डेड स्टोरेज माना जाता है। पीछे रहे पानी में से करीब 20 से 22 दिन तक शहर को पानी पिलाया जा सकता है।