
खारिया मीठापुर (जोधपुर) . वन विभाग की बिलाड़ा रेंज में हरियाली के नाम पर कंटीली विलायती बबूल फैल चुका है। पर्यावरण के लिए हानिकारक यह बबूल देसी पेड़-पौधों और वनस्पति को नष्ट कर रहा है। इससे वनस्पति और जीव जंतुओं की कई प्रजातियां नष्ट हो चुकी है।
वन राज्य मंत्री का कहना है कि विभागीय अधिकारियों को फल, फूल और छायादार पौधे लगाने के निर्देश दिए हैं। दूसरी तरफ विभागीय अधिकारियों का कहना है कि उनके पास विलायती बबूल साफ कराने का बजट नहीं है।वन विभाग विलायती बबूल को रोकने में कामयाब नहीं हो पा रहा है।
उपखंड क्षेत्र के सरकारी कार्यालयों से लेकर खाली प्लॉटों, खेतों की मेड़, खेत-खलिहान से लेकर जंगल तक विलायती बबूल का जाल नजर आ रहा है। जिस जगह इनकी झांडिया हैं वहां जलस्तर नीचे चला गया है। शरीर में विष घोल देता है।
कांटा, पशुओं की जान पर भी भारी
बबूल की कंटीली डालियां फैलने के बाद मवेशी उस क्षेत्र में नहीं जा सकते है। इसके कांटे घाव काफी मुश्किल से भरता है। वन भूमि पर चरने वाले मवेशियों को बबूल के कांटे लग जाए तो लम्बे समय तक लंगड़ाते हुए चलते हैं। पशुपालकों ने बताया कि विलायती बबूल के कारण मवेशियों के चरने की जगह नहीं बची है।
दुर्घटनाओं का कारण
बिलाड़ा तहसील के ग्रामीण क्षेत्र में सडक़ों के दोनों तरफ विलायती बबूल फैले हुए हैं। इस कारण कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इससे वाहन चालकों को कई रास्तों पर 10 मीटर दूर का वाहन तक नजर नहीं आता।
1659 बीघा वनभूमि पर अतिक्रमण
जानकारी के अनुसार वन विभाग के बिलाडा रेंज कार्यालय के अधीन 5487 बीघा भूमि है। राजस्व विभाग के रिकार्ड के अनुसार इसमें से 3827 बीघा भूमि वन विभाग के पास है। बाकी 1659 बीघा भूमि पर अतिक्रमण है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कापरड़ा, ओलवी, झुरली, पीपाड़, सोवनिया, पड़ासला कलां, बुचेटी तृतीय, बिराई प्रथम व द्वितीय, बावड़ी नर्सरी चौकी की रक्षित वनभूमि वन अतिक्रमण की भेंट चढी हुई है।
इन्होंने कहा
‘विलायती बबूल नुकसानदायक है। वन अधिकारियों को इसकी जगह छायादार, फलदार और खुशबूदार पौधे लगाने के निर्देश दिए हैं।
सुखराम विश्नोई, वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री।
‘वनविभाग के पास बबूल कटवाने का बजट नहीं है। सरकार या विभाग बजट जारी करे तो इनको कटवाकर छायावार व फलदार पौधे लगाए जा सकते हैं।
कैलाशगिरी, रेंजर वनविभाग बिलाड़ा
हरियाली के चक्कर मे प्रदेश मे विलायती बबूल फैल चुका है। ये अन्य पौधो को पनपने नहीं देता। सरकार मनरेगा योजना या भामाशाह की मदद से इन्हें कटवा सकती है।
-विकास अरोड़ा, एसीएफ , वन विभाग, जोधपुर