जोधपुर

दशकों बाद पहली बार जुवेनल के साथ स्नेह प्रदर्शित करती नजर आई कुरजां

-मारवाड़ के कई प्रमुख और तालाबों से अचानक कुरजां के समूह गायब होने से पक्षी विशेषज्ञों ने जताई चिंता-कड़ाके की सर्दी शुरू नही होने और फसल कटान में देरी हो सकता है कारण
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Nov 10, 2020
दशकों बाद पहली बार जुवेनल के साथ स्नेह प्रदर्शित करती नजर आई कुरजां
दशकों बाद पहली बार जुवेनल के साथ स्नेह प्रदर्शित करती नजर आई कुरजां

जोधपुर. प्रेम और विरह के प्रसिद्ध लोकगीत के प्रतीक प्रवासी मेहमान पक्षी कुरजां इन दिनों खींचन क्षेत्र के अलावा मारवाड़ के विभिन्न जलाशयों पर अचानक कई दिनों से नजर नहीं आने से पक्षी विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है। साथ ही दशकों के बाद पहली बार कुछ कुरजां को खींचन के तालाब पर अपने जुवेनल (बच्चे) के साथ स्नेह प्रदर्शित करते भी देखा गया है।

छह माह करते है ठहराव
जब उत्तरी रूस, उक्रेन, तथा कजाकिस्तान में बर्फ जमने लगती है तो सारस प्रजाति के सदस्य कुरजां हजारों मील का सफर तय कर जोधपुर के आस-पास के विभिन्न क्षेत्रों में खेतों, पोखर, तालाब, नाडियो पर पहुंचते है। जोधपुर जिले का खींचन कुरजां का सर्वाधिक पसंदीदा स्थल हैं जहां करीब 20 से २५ हजार से अधिक कुरजां प्रतिवर्ष करीब छह माह के पड़ाव के लिए पहुंचती हैं। शर्मीले स्वभाव के पक्षियों की संख्या में कड़ाके की सर्दी बढऩे के साथ उत्तरोत्तर बढ़ोतरी होती जाती है।

कड़ाके की सर्दी शुरू नहीं होना भी कारण
जोधपुर जिले के गुड़ा विश्नोइयां, जाजीवाल, खेजड़ली, सुरपुरा, लोरड़ी पंडितजी, जोधपुर बाड़मेर जिले से सटे कोरना तालाब पर बड़ी संख्या में नजर आने वाले कुरजां के समूह इन दिनो नदारद है। कुरजां को मिलने वाला भोजन खेतों में फसल कटान के बाद वेस्ट मेटेरियल से कीड़े मकोड़ों के रूप में प्राप्त होता है। लेकिन इस बार खेतों में अभी तक फसल कटान का कार्य चल रहा है। जोधपुर जिले में अभी तक कड़ाके की सर्दी शुरु का नहीं भी कुरजां के नजर नहीं आने का कारण हो सकता है।
डॉ. हेमसिंह गहलोत, पक्षी विशेषज्ञ व सदस्य, स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड

यह भी है परेशानी
खींचन में स्थित विभिन्न तालाबों पर दिन के समय भी पशु पालक अपने मवेशी चराने पहुंचते है। मवेशियों के साथ ही श्वान भी पहुंच जाते है और मानवीय व श्वानों के हस्तक्षेप के कारण पक्षी जगह छोड़कर उड़ान भरने के लिए मजबूर हो जाते है। एेसे में स्थानीय प्रशासन को तालाबों में बढ़ते हस्तक्षेप को रोकने की जरूरत है।

Updated on:
10 Nov 2020 05:53 pm
Published on:
10 Nov 2020 05:53 pm