
पशुपालन विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. भागीरथ सोनी ने बताया कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अन्तर्गत सेक्स शॉर्टेड पायलट प्रोजेक्ट के तहत फलोदी नोडल क्षेत्र में 275 गायों का कृत्रिम गर्भाधान किया गया था। जिसमें से ४५ गायों का गर्भाधान हुआ था। गर्भाधान प्रतिशत कम होने के कई कारण होते है। इस तकनीक में बछड़ी का ही जन्म होता है तथा ९० फीसदी तक बछड़ी के जन्म की संभावना रहती है। गुरुवार को फलोदी क्षेत्र में इस परियोजना के तहत कृत्रिम गर्भाधान से पहली बछड़ी ने मधुजी की बेरी फलोदी निवासी हरिकिशन व्यास के यहां जन्म लिया। जिसका नाम लक्ष्मी रखा गया है।
एक्स गुणसूत्र के शुक्राणुओं को किया जाता है अलग-
बछड़ी के जन्म के लिए इस तकनीक में सीमन से एक्स गुणसूत्र के शुक्राणुओं को मशीन से अलग किया जाता है। उसके बाद सीमन को लिक्विड नाइट्रोजन में -197 डिग्री सेल्सियस तापमान में रखा जाता है। उसके बाद कृत्रिम गर्भाधान करवाया जाता है। (कासं)
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