
शिक्षा विभाग में कुछ वर्षों पहले शुरू हुआ स्टाफिंग पैटर्न का नियम स्कूली विद्यार्थियों की सुविधाओं के साथ भेदभाव कर रहा है। इस नियम के तहत जिन सैकंडरी व सीनियर सैकंडरी स्कूलों में 390 से कम नामांकन हैं, उन्हें स्पोटर््स ग्रांट राशि से वंचित किया जा रहा है।
जबकि शिक्षा विभाग ने साल 2020-21 में प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय को 5 हजार व प्रत्येक उच्च प्राथमिक विद्यालय को 9 हजार रुपए की राशि समग्र शिक्षा अभियान की ओर से प्रदान की है। वहीं जिन स्कूलों में छात्र संख्या 390 या इससे अधिक हैं, उन स्कूलों को 25 हजार रुपए की राशि जारी की जा चुकी है। वहीं जिन सीनियर सैकंडरी व सैकंडरी स्कूलों में छात्र नामांकन 390 से कम हैं, उन्हें किसी प्रकार की स्पोट्र्स राशि जारी नहीं की गई है। संयुक्त निदेशक प्रेमचंद सांखला ने कहा कि वे शारीरिक शिक्षकों की बात उच्चाधिकारियों तक पहुंचाएंगे।
350 से 385 तक हैं कई स्कूलों में छात्र
प्रदेश के कई सैकंडरी व सीनियर सैकंडरी स्कूलों का नामांकन 350 से 385 के मध्य हैं, ऐसी स्कूलों में 5 व 10 विद्यार्थी कम होने के कारण उन्हें 25 हजार रुपए ही नहीं मिले। ऐसे नियमों से प्रदेश के सैकड़ों स्कूल प्रभावित हुए है।
भेदभाव बर्दाश्त नहीं: चौधरी
राजस्थान शारीरिक शिक्षा शिक्षक संघ प्रदेशाध्यक्ष जगदीश चौधरी ने कहा कि ऐसे नियम विद्यार्थी हित में नहीं है। राज्य सरकार के लिए एक और 390 सभी विद्यार्थी समान है। शनिवार को नौ बैग डे घोषित हो रखा है। इन शेष बची स्कूलों में खेलकूद सामग्री किस प्रकार से उपलब्ध हो सकेगी। इस संबंध में संघ ने संयुक्त निदेशक प्रेमचंद सांखला को ज्ञापन भी दिया है।