
जोधपुर. जिला प्रमुख चुनाव प्रक्रिया में सात घंटे ऐसा घटनाक्रम चला मानो किसी ने फिल्म की पटकथा में यह पहले ही लिख गया हो। सस्पेंस और एकदम से कहानी में मोड़ आना यह सब जैसे किसी फिल्म में हो रहा हो।
कहानी शुरू हुई सुबह 10.18 बजे। जब सबसे पहले लीला मदेरणा अपने समर्थकों व दो प्रस्तावकों के साथ पहुंची, साथ में थी विधायक दिव्या मदेरणा। तब लगा कि कांग्रेस में एकराय हो गई है। लेकिन महज 10 मिनट बाद ही मुन्नी गोदारा भी नामांकन दाखिल करने पहुंची और कहानी में ट्विस्ट आ गया। 10.30 से 10.45 के बीच भाजपा की चम्पादेवी ने नामांकन दाखिल कर दिया। इसके बाद जब 11 बजने में कुछ मिनट बाकी थे तो नेहा चौधरी भी नामांकन दाखिल करने पहुंची और फिर कहानी में मोड़ आ गया। प्रियंका गोदारा स्थिति को रोचक बना सकती थी, लेकिन वे दो मिनट देरी से पहुंची।
नामांकन की जांच में कुल पांच प्रत्याशी मैदान में रहते हैं और नाम वापसी से करीब आधे घंटे पहले प्रशांत बैरवा मीडिया के सामने आते हैं और कहते हैं कि कांग्रेस से बाकी जिन्होंने भी नामांकन भरा है, वह वापस होंगे। लेकिन 1 बजे तक भी जब लीला देवी के अलावा अन्य प्रत्याशी नहीं पहुंचे तो कहा गया कि ट्रैफिक में फंस गए। 1 बजकर 05 मिनट और उनके एक मिनट बाद नेहा चौधरी व मुन्नी देवी भागते हुए पहुंचे। मगर जिला निर्वाचन अधिकारी ने नाम वापसी का समय गुजर जाने की बात कह कर लौटा दिया। इसके बाद भाजपा की उम्मीदें जाग गई। भाजपा के प्रत्याशियों ने पहले मतदान भी कर दिया। शाम करीब 4.30 बजे कड़े पहरे में कांगे्रस के सभी सदस्य आए। बाउंसर्स के घेरे में, किसी से मिलने नहीं दिया गया और सीधे मतदान करवाया। जब परिणाम आए तो मदेरणा परिवार के नाम के जयकारे गंूज रहे थे।