
जोधपुर। सात महीने पहले थार मरुस्थल पहुंचने के बाद टिड्डी अब तक प्रजनन के जरिए अपनी 3 पीढ़ी बना चुकी है। अरबों की संख्या पार कर गई टिड्डियों के दल खेत में खड़ी फसल चट कर रहे हैं। गत पखवाड़े में असंख्य टिड्डी ने बाड़मेर, जैसलमेर, जालोर, बीकानेर में हमला किया है।
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक सोमालिया व इथोपिया के बाद भारत की स्थिति सर्वाधिक भयावह है। एफएओ की ओर से बुलेटिन के साथ जारी नक्शे में पूरा पश्चिमी राजस्थान लाल नजर आ रहा है। यूएनओ ने इसे 25 साल बाद विश्व में सबसे बड़ा टिड्डी अटैक माना है। वैसे यह समय टिड्डी के भारत से पाकिस्तान, ईरान सहित मध्य पूर्व के देशों की ओर लौटने का समय है, लेकिन हवा की बदली दिशा और पाकिस्तान के नियंत्रण में नाकाम रहने से बड़ी संख्या में टिड्डी दल भारत में मौजूद हैं।
बाड़मेर व फलोदी के बीच पैदा हुए टिड्डी दल टिड्डी ने नवम्बर-दिसम्बर में भारत पाकिस्तान बॉर्डर के अलावा बाड़मेर-फलोदी के मध्य, गुजरात के पालनपुर में प्रजनन किया। अब कच्छ के रण में तीसरा प्रजनन कर रही है। इनकी संख्या करोड़ों में हो गई है। वयस्क हो गई टिड्डियां सर्दी के बावजूद अब तक खत्म नहीं हो सकी है।
दिसम्बर में किस देश में टिड्डी पर कितना स्प्रे
देश का नाम -------- नियंत्रण (हेक्टेयर में)
अल्जीरिया -------- 25
मिश्र -------- 30
इरिट्रिया -------- 11078
इथोपिया --------8410
भारत -------- 22113
ईरान -------- 2372
मोरिटिआना -----93
ओमान --------1710
पाकिस्तान ------71388
सऊदी अरब -----43798
सूड़ान --------26846
यमन -------- 80
नया दल नहीं आया तो इसी सप्ताह सफाया ‘हमने दो दिन में टिड्डी पर काफी नियंत्रण किया है। नया दल नहीं आया तो इसी सप्ताह टिड्डी का सफाया कर दिया जाएगा।
डॉ. केएन गुर्जर, उप निदेशक, टिड्डी चेतावनी संगठन