जोधपुर

आखातीज से कम नहीं इस बार नवम्बर- दिसम्बर के सावे

बिलाड़ा (जोधपुर). नवम्बर व दिसम्बर माह के सावे इस बार अक्षय तृतीया के समान ही होने से यहां के बाजार में इन दिनों खरीदारों की एकाएक भीड़ उमडऩे लगी है। एक अरसे से जो दुकानदार ग्राहकों के इंतजार में बैठे रहे उनके चेहरों पर भी अब मुस्कान लौट चुकी है। कस्बे की नई सड़क, मोती चौक, सदर बाजार, पुरानी सब्जी मंडी, लाल चौक बाजार, पिछले बाजार की दुकानों पर इन दिनों ग्राहकों की भीड़ सी नजर आ रही है।
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Nov 06, 2020
आखातीज से कम नहीं इस बार नवम्बर- दिसम्बर के सावे
आखातीज से कम नहीं इस बार नवम्बर- दिसम्बर के सावे

बिलाड़ा (जोधपुर). नवम्बर व दिसम्बर माह के सावे इस बार अक्षय तृतीया के समान ही होने से यहां के बाजार में इन दिनों खरीदारों की एकाएक भीड़ उमडऩे लगी है। एक अरसे से जो दुकानदार ग्राहकों के इंतजार में बैठे रहे उनके चेहरों पर भी अब मुस्कान लौट चुकी है। कस्बे की नई सड़क, मोती चौक, सदर बाजार, पुरानी सब्जी मंडी, लाल चौक बाजार, पिछले बाजार की दुकानों पर इन दिनों ग्राहकों की भीड़ सी नजर आ रही है।


कोरोना काल के मार्च 2020 से लॉक डाउन लग चुका था और तभी से बाजारों में वीरानी सी छा गई थी। मात्र दवाइयों एवं किराना जैसी आवश्यक वस्तुओं की दुकानें निर्धारित समय पर खुली ,जबकि कपड़ा, स्टेशनरी, मिठाई, नमकीन, रेस्टोरेंट, स्वर्णकार, टेंट, हलवाई, गाजे-बाजे, दर्जी, नाई आदि सभी के प्रतिष्ठान बंद रहे।

करीब 8 माह बाद बाजार में एकाएक व्यापार फिर से होने लगा है। इस अवधि में जिन परिवारों में शादी- ब्याह होना तय हुआ था वह सभी रोके गए। लॉकडाउन के चलते प्रवासी लोगों का, रिश्तेदारों का, ऐसे समारोह में आना दूभर हो गया था, वहीं प्रशासन ने भी ज्यादा लोगों के एक स्थान पर रुकने पर प्रतिबंध लगा रखा था।

मास्क लगाना बन गई आदत
अनलॉक-4 के इस दौर के आते-आते मास्क लगाना और दूरी बनाए रखने की आदत लोगों के स्वभाव में आ चुकी है, तथा गाइडलाइन की पालना दुकानदार भी करने लगे हैं। प्रशासन ने भी 'नो मास्क- नो एंट्रीÓ का अभियान चला रखा है। प्रत्येक दुकानदार ने अपने प्रतिष्ठानों पर इस आशय की सूचना भी लिखवा दी है। ऐसे में ग्राहक भी अब बिना मास्क दुकानों पर नहीं चढ़ते हैं। कोरोना के कारण हुई मौतों के समाचार जान ग्रामीण विशेषकर ध्यान रखने लगे हैं, विशेषकर ग्रामीण महिलाओं में भी यह डर दिक रहा है।

लोगों में आखातीज जैसी खुशी

जिन परिवारों में आखा तीज के अवसर पर या आसपास के दिनों में शादियां होनी थी और लॉकडाउन के चलते रोक दी गई थी, उन परिवारों में अब आखातीज पर्व जैसी ही उमंग देखी जा रही है। बाजार में कपड़ा दुकानदार , मनिहारों की दुकानों, बर्तनों, टेंट, मिठाई दुकानदारों, रेस्टोरेंट, बैंड बाजों, कुम्हार की दुकानों पर भीड़ देखी जा रही है।

सोने के दामों में आई एकाएक महंगाई से हर कोई परेशान है, लेकिन शादी ब्याह, मायरा आदि में अपनी साख रखने के लिए जरूरत मुताबिक लोग खरीदी भी कर रहे हैं।

Published on:
06 Nov 2020 09:42 am