
अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. नगर निगम की अरणा फांटा स्थित जमीन पर निजी फर्म की ओर से संचालित प्लांट पर मेडिकल बायोवेस्ट निस्तारण के कार्य में लापरवाही बरती जा रही है। इस प्लांट में कई दिनों तक जैविक कचरे का निस्तारण नहीं हो रहा है। जबकि जोधपुर शहर से 150 किलोमीटर की परिधि में बने निजी व सरकारी अस्पतालों से हर रोज 1 हजार किलो बायोवेस्ट एकत्रित होकर यहां आता है। समय पर निस्तारण नहीं होने से केरू व बड़ली जैसे आसपास के क्षेत्रों में मेडिकल बायोवेस्ट से संक्रमण का खुला खतरा मंडरा रहा है। दूसरी ओर अस्पतालों में भी कई दिनों तक खुले में पड़ा मेडिकल बायोवेस्ट संक्रमण को आमंत्रण देता है।
लापरवाही: टीम पहुंची तो करीब 3 हजार किलो बायोवेस्ट पड़ा मिला
पत्रिका टीम बड़ली-केरू स्थित अरणा फांटा में मेडिकल बायोवेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट पर पहुंची। इसी क्षेत्र में नगर निगम का डंपिंग यार्ड, मृत पशु गृह प्लांट भी संचालित होता है। यहां प्लांट की बदबू करीब 3 सौ मीटर की दूरी पर ही आने लग गई। टीम ने भीतर प्रवेश किया तो प्लांट के पीछे की तरफ करीब 3 हजार किलो बायोवेस्ट पड़ा मिला। यहां जिम्मेदारों ने बताया कि दरअसल, बारिश व बिजली गुल होने के दौरान प्लांट नहीं चल पाता। इस कारण जैविक कचरा इक_ा हो रखा है। जबकि नियमानुसार 10 से 12 घंटे में मेडिकल बायोवेस्ट का निस्तारण हो जाना चाहिए।
कोताही : कई अस्पताल भी नहीं कर रहे नियमों की पालना
सरकारी व निजी अस्पताल बायोमेडिकल वेस्ट के एकत्रित करने को लेकर नियमों की पालना नहीं कर रहे। विभिन्न जैविक कचरे को कई अस्पताल संबंधित कैरी बैग में नहीं डाल रहे। जबकि नियमों के तहत पीले बैग में कटे मानव अंग, टिशू, पट्टियां, कॉटन स्वैब, रूई, प्लास्टर, रक्त से सनी हुई ड्रेसिंग, केमिकल, एक्सपायर्ड दवाइयां डाली जाती हैं। लाल बैग में प्लास्टिक कचरा, आइवी सेट, ग्लूकोज बोतल, ग्लव्ज, सीरींज आदि। सफेद बाल्टी में हाइपोक्लोराइट सॉल्यूशन बना कर ब्लैड, कैंची, नष्ट की गई सुई आदि डाली जाती है। नीले रंग के पंक्चरप्रुफ व लीकप्रुफ में कांच की बोटलें व बॉडी इम्प्लांट्स को रखा जाता है।
खतरा : कई अस्पतालों में नहीं अलग से कक्ष, खुले में बिखरा रहता है संक्रमण का सामान
संभाग के सबसे बड़े मरीज भार वाले मथुरादास माथुर अस्पताल के पास खुद का बायोवेस्ट एकत्रित करने का कक्ष तक नहीं है। ये बात खुद अधीक्षक डॉ. एमके आसेरी स्वीकारते हैं। एमजीएच के अधीक्षक डॉ. महेश भाटी का कहना है कि कीचन के पीछे कक्ष बने हुए हैं। जबकि यहां तो कई बार कीचन के बाहर मेडिकल बायोवेस्ट पड़ा रहता है। कीचन के पास बायोवेस्ट इक_ा करना भी संक्रमण को खुला आमंत्रित करने जैसा नजर आया। इन दोनों अस्पतालों समेत कई अस्पतालों में लिक्विड मेडिकल बायोवेस्ट के निस्तारण को लेकर भी कोई योजना नहीं है। यहां लिक्विड वेस्ट को नगर निगम के सॉलिड वेस्ट के साथ या फिर केमिकल के जरिए ऑपरेशन थिएटर में निस्तारित किया जाता है। वहीं निजी अस्पताल जगह के अभाव में अलग से कक्ष नहीं बनवाते। हालांकि एम्स व अन्य कुछेक निजी अस्पतालों में मेडिकल बायोवेस्ट एकत्रित करने की पुख्ता व्यवस्था नजर आई।
नया प्लांट स्थापित कर रहे
पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के नए नियमों के तहत नया प्लांट स्थापित कर रहे हैं। जो अपग्रेड होने के साथ कंप्यूटराइज्ड होगा। जो इसी माह शुरू हो जाएगा। कई अस्पताल तो पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की ओर से निर्धारित कैटेगरी अनुसार बैग में जैविक कचरा नहीं डाल रहे हैं। सभी जगह से मेडिकल बायोवेस्ट मिक्स होकर आ रहा है। ये हमारे मशीनरी के लिए बड़ी परेशानी है। हमारे यहां नई मशीन इंस्टॉल होने की वजह से हम जैविक कचरे का समय पर निस्तारण नहीं कर पा रहे हैं। बीच में मौसम की वजह से परेशानी आई।
- अरशद अली, प्लांट मैनेजर, सेल्स प्रमोटर, अरना फांटा
संवेदक को पाबंद करेंगे
प्लांट में रिनोवेशन का कार्य चल रहा है। जिस कारण ट्रीटमेंट प्रोसेस स्लो हुआ है। नगर निगम की ओर से संवेदक को पाबंद किया जाएगा अथवा नियमानुसार शास्ति भी लगाई जाएगी।
- डॉ. सचिन मौर्य, स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम
कई बार नोटिस दिए
बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में कोताही को लेकर हमने कई बार नोटिस दिए हैं। इसका नवीनीकरण भी नहीं किया गया है। इस पर कानूनी कार्यवाही की तैयारी कर रहे हैं।
- जगदीश सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण मंडल