
फलोदी (जोधपुर). सात समन्दर पार कर शीतकालीन प्रवास पर हजारों की तादाद में खीचन आने वाले मेहमान पक्षी कुरजां के साथ कई नए पक्षियों के आने का सिलसिला जारी है। साथ ही मौसम में ठण्डी फिजाओं के घुलने से कुरजां की संख्या भी लगातार बढ़ रही है और इन दिनों करीब 10 हजार कुरजां पक्षी शीतकालीन प्रवास पर पंहुच चुके हैं।
खीचन में कुरजां के पड़ाव स्थलों पर हजारों की तादाद में स्वच्छंद विचरण करते पक्षियों के साथ यहां अब ग्रिफन वल्चर भी नजर अया है। कुरजां की अठखेलियों को निहारने के लिए खीचन के विजयसागर पर फोटाग्राफी करते समय नागपुर की वन्यजीव विशेषज्ञ गजाला खान ने ग्रिफन वल्चर (गिद्ध) के कुरजां के साथ रोमांचक दृश्य कैमरे में कैद किए तथा पत्रिका को उपलब्ध करवाए।
कुरजां की अठखेलियों के बीच ग्रिफन वल्चर
वन्यजीव विशेषज्ञ गजाला खान व पक्षी प्रेमी सेवाराम माली ने बताया कि वे सोमवार को खीचन के विजयसागर तालाब पर कुरजां की अठखेलियां देखने के लिए पहुंचे थे। इस दौरान वहां हजारों की तादाद में कुरजां पक्षियों की अठखेलियों के बीच एक ग्रिफन वल्चर भी नजर आया। जो तालाब व पाळ पर विचरण करता दिखा। उन्होंने बताया कि ग्रिफन वल्चर का कुरजां के साथ देखा जाना एक बेहतरीन नजारा था। भूरे रंग व सफेद सिर वाले ग्रिफन वल्चर मृत पशुओं को खाते हैं तथा इस तरह के क्षेत्रों में मिलते है। साथ ही इसकी लम्बी गर्दन मृत पशुओं के अन्दर तक पहुंचने व गले पर बाल संक्रमण को रोकने का काम करते हैं।
गजाला ने खीचन में पक्षियों के लिए मेहमानवाजी की सराहना की तथा यहां पड़ाव स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्थाओं में सुधार व व्यवधान को रोकने के लिए प्रयासों की आवश्यकता बताई। वहीं बीकानेर के वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. प्रतापसिंह व डॉ. जितेन्द्र सोलंकी ने बताया कि ग्रिफन वल्चर मंगोलिया, कजाकिस्तान आदि देशों से शीतकालीन प्रवास पर राजस्थान, गुजरात सहित कई स्थानों पर आते हैं।
इसमें बीकानेर के जोहड़बीड़ में इनकी काफी संख्या देखने को मिलती है। ग्रिफन वल्चर की औसत आयु 30-35 वर्ष व वजन करीब 10 किलो होता है। इनकी खास बात ये है कि दोनों पंख फैलने के बाद विंगस्पान करीब 7 फीट तक होता है तथा लंबाई 90 से 110 सेमी तक होती है।
मुख्य आकर्षण है कुरजां की अठखेलियां
मंगोलिया, चीन, कजाकिस्तान में बर्फबारी के कारण भोजन की उपलब्धता में कमी के कारण यहां शीतकालीन प्रवास पर खीचन आने वाली कुरजां पक्षियों की मनमोहक अठखेलियां पर्यटकों के लिए आकर्षण बनी हुई है। सुबह पक्षी चुग्गाघर व दोपहर से शाम तक तालाबों पर पक्षियों को देखने के लिए यहां पर्यटकों, पक्षी विशेषज्ञों व वन्यजीव फोटाग्राफर का तांता लगना शुरू हो गया है।