
जोधपुर.
राजस्थान हाईकोर्ट में न्यायाधीश अरुण भंसाली की अदालत ने जालौर, पाली और सिरोही जिले में कार्यरत एमआइएस मैनेजर और कंप्यूटर प्रोग्रामर के पद पर कार्यरत संविदाकर्मियों को स्थाई कर्मचारियों के समकक्ष न्यूनतम नियमित वेतन शृंखला देने का आदेश दिया है।
यह आदेश ग्रामीण विकास व पंचायती राज विभाग के अधीन जिला परिषद कार्यालय में 10 वर्ष से कार्यरत दिनेशकुमार चौधरी व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं का निस्तारण करते हुए दिए।
इससे पूर्व अधिवक्ता अभिमन्युसिंह रणीसर ने कहा कि संविदा पर कार्यरत याचिकाकर्ताओं को 14 हजार रुपए मासिक वेतन मिल रहा है।
जबकि विभाग में स्थाई तौर पर कार्यरत एमआइएस मैनेजर और कंप्यूटर प्रोग्रामर को उन से 5 गुना अधिक वेतन प्राप्त हो रहा है।
अप्रार्थी विभाग के अधिवक्ता की ओर से कहा गया कि संविदाकर्मियों को स्थाई कर्मियो के समान वेतन देने का प्रावधान नही है।
सभी पक्ष सुनने के बाद अदालत ने सर्वोच्य न्यायालय के पंजाब सरकार बनाम जगजीतसिंह व अन्य मामले और राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से एक अन्य मामले में जारी दिशा निर्देश के अनुसरण करते हुए याचिकाकर्ताओं को 4 सप्ताह मे समान पद के स्थाई कर्मचारियों के समकक्ष न्यूनतम नियमित वेतन शृंखला देने का आदेश दिया।