
जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने नारी निकेतनों में निरुद्ध मानसिक रूप से बीमार रोगियों का एक समेकित रिकॉर्ड बनाए रखने का निर्देश दिया है। न्यायाधीश अरुण भंसाली एवं न्यायाधीश राजेंद्र प्रकाश सोनी की खंडपीठ में एक याचिका की सुनवाई के दौरान न्याय मित्र अनिता राजपुरोहित ने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों की ओर से प्राप्त नारी निकेतनों की निरीक्षण रिपोर्ट में कई कमियां सामने आई हैं।
कोर्ट ने सभी निकेतनों की रिपोर्ट अतिरिक्त महाधिवक्ता को देने के निर्देश दिए हैं, ताकि राज्य सरकार कमियों को दूर करने के साथ-साथ अपना प्रत्युत्तर दाखिल कर सके। कोर्ट ने जोधपुर स्थित नारी निकेतन में अधूरे रहे सिविल कार्य को पूरा करने के लिए ठेकेदार के बकाया भुगतान को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नारी निकेतन में निरुद्ध मानसिक रूप से बीमार महिलाओं की काउंसलिंग रिपोर्ट अधीक्षक के माध्यम से काउंसलर के साथ साझा करने को कहा है, जिसका एकमात्र उद्देश्य महिलाओं के पुनर्वास के प्रयास करना है।
कोर्ट के अहम निर्देश
- कोर्ट ने अस्पताल और नारी निकेतनों को मानसिक रूप से बीमार रोगियों का एक समेकित रिकॉर्ड बनाए रखने का निर्देश दिया है, जिसमें उनके परिवार के सदस्यों या शुभचिंतकों की पूछताछ की सुविधा के उद्देश्य से आवश्यक विवरण भी शामिल होगा।
- समेकित रिकॉर्ड को अस्पताल या नारी निकेतन के अधीक्षक के पास रखा जाएगा, जो पहले पूछताछ करने वाले व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करेगा और प्रमाणिकता के बारे में संतुष्ट होने पर उसे मरीजों के समेकित रिकॉर्ड को देखने की अनुमति देगा।
उपचार एवं पुनर्वास
नारी निकेतन के मरीजों के बेड हेड टिकट आदि की प्रतियां एक सीलबंद लिफाफे में संयुक्त निदेशक, सामाजिक न्याय विभाग को उपलब्ध करवाए जाने को कहा गया है, जिसे वे अपनी कस्टडी में रखेंगे और जब भी आवश्यकता होगी, उन्हें संबंधित नारी निकेतन, बाल सुधार गृह या अन्य संप्रेषण गृह को उपलब्ध कराएंगे। कोर्ट ने कहा कि इसका उपयोग मरीजों के उपचार एवं पुनर्वास के उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाए कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम की धारा 23 और 24 के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए इसे किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपलब्ध नहीं करवाया जाए।