
अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. सूर्यनगरी में कोरोना के मामले थम नहीं रहे हैं। इसके चलते बड़ी तादाद में जांच करने वाले टेक्निशियन को पीपीई किट पहनना पड़ रहा है। पीपीई किट पहनने की बजाय अब लैब टेक्निशियन कोरोना संदिग्धों के स्वाब के नमूने कियोस्क के माध्यम से लेंगे। इस व्यवस्था में लैब टेक्निशियन को पीपीई किट पहनने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इसके लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने प्रशासन व माइक्रोबायोलॉजी विभाग डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज से अनुमति व मार्गदर्शन मांगा है। हालांकि इसकी ट्रायल शुरुआत एक एनजीओ के मार्फत स्वास्थ्य विभाग ने कर दी है। जो प्रयोग सफल रहा है। इसको स्वास्थ्य विभाग पूरे जोधपुर में लागू करेगा।
देशभर में अपना रहे नया पैटर्न
इस तरह का प्रयोग देशभर में कई अस्पताल व चिकित्सा विभाग अपना रहा है। सुरक्षा के लिहाज से चिकित्सकों के लिए कियोस्क बेहतर है। ये सुविधा आ जाने से सैंपल लेने वाले तकनीशियन और चिकित्सकों को पीपीई किट की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे सुरक्षा घेरे में रहकर कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों के सैंपल ले सकेंगे। इससे उन्हें संक्रमण का खतरा कम होगा। यह कियोस्क तीन तरफ से बंद रहता है, जबकि एक तरफ शीशा लगा होता है। अंदर लैब तकनीशियन रहेंगे। इनका दोनों हाथ बाहर रहेगा। जो सीधे मरीज के चेहरे पर उनका हाथ स्पर्श करेगा।
तकनीशियन हाथ में ग्लव्स और अन्य जरूरी सुरक्षा के उपकरण पहने रहेंगे। कियोस्क के अंदर से ही मरीज का सैंपल लिए जाएंगे। इसकी खासियत यह है कि अंदर रहने वाले व्यक्ति और मरीज के बीच कोई संपर्क नहीं होगा। जिससे वायरस का शिकार होने का खतरा नहीं होगा। इससे कोरोना संदिग्ध के साथ- साथ चिकित्सक और तकनीशियन को भी जांच में सहूलियत होगी।