
जोधपुर. शहर में ‘अमृत’ बचाने और इसी अमृत से होने वाली कमाई बढ़ाने के लिए अमृत योजना का सहारा लिया जा रहा है। राज्य सरकार ने इसके लिए जोधपुर शहर को ९ करोड़ से अधिक का बजट दिया है। खास बात यह है कि शहर में एक तिहाई से अधिक घरों में खराब पानी के मीटर है। लेकिन बदले जाएंगे सिर्फ ४८ सौ मीटर।
शहर में करीब दो लाख वैध पानी कनेक्शन है। इनसे करीब ७ करोड़ का राजस्व जलदाय विभाग अर्जित करता है। पिछले लम्बे समय से एक तिहाई घरों के पानी बिल औसत रीडिंग से ही आ रहे हैं। इसके दो प्रमुख कारण है। इसमें पहला कारण पानी के मीटर खराब होना या लगे ही नहीं होना है और दूसरा कार्मिकों के पानी मीटर की रीडिंग ही नहीं लेना है। लेकिन अब अमृत योजना से करीब ५ से १० प्रतिशत तक राजस्व बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन इनमें से उन्हीं के मीटर बदलेंगे जहां से अधिक राजस्व आने की उम्मीद है।
एक नजर में पानी सिस्टम
- १.९५ लाख उपभोक्ता है शहर में
- ७ करोड़ का राजस्व आता है
- ५० प्रतिशत से अधिक घरों में मीटर खराब होने से औसत आता है बिल
- ४८०० पानी मीटर बदलने का लक्ष्य
- ९ करोड़ से अधिक राशि अमृत योजना में होगी खर्च
जहां से ज्यादा कमाई उसे बदलेंगे अमृत योजना में
जो ४८ सौ पानी मीटर बदलने और नए लगाने का लक्ष्य रखा गया है उसमें अधिकांश व्यावसायिक और इंडस्ट्रीयल मीटर है। इन मीटर को बदलने के कारण वर्तमान राजस्व जो ७ करोड़ रुपए मासिक है उसमें ५० लाख रुपए तक की वृद्धि करना है।
निजी मीटर नहीं बदलेंगे
एेसे मीटर जो उपभोक्ता ने स्वयं अपने स्तर पर लगाए हैं उनको बदलने के लिए फिलहाल कोई कार्ययोजना नहीं है। एेसे उपभोक्ता औसत बिल से खुश है। उनके निर्धारित राशि आ रही है। लेकिन विभाग भी मीटर बदलने के लिए दबाव नहीं बना रहा, इसके पीछे कारण नियमित रीडिंग लेने वालों का अभाव है। ९ करोड़ में यह काम भी शामिल जिस अमृत योजना के बूते पानी का सिस्टम मजबूत करने का दावा किया जा रहा है उसमें मीटर बदलने के साथ ही कई स्थानों पर पाइप लाइन बदलना और तीन पम्पिंग स्टेशन पर मशीनरी बदलना भी शामिल है।
इनका कहना...
अमृत योजना में ४८ सौ मीटर बदलने का लक्ष्य रखा है। इंडस्ट्रीयल और कॉमर्शियल कनेक्शन के मीटर पहले चरण में बदलेंगे। किसी के निजी मीटर है तो वह उपभोक्ता को खुद ही बदलना होता है।
- दिनेश कुमार पेडीवाल, अधीक्षण अभियंता, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, जोधपुर।