
जोधपुर।
कृषि विश्वविद्यालय जिले के लूणी गांव के किसानों के जीवन में खुशहाली लाया है। कृषि विश्वविद्यालय ने करीब ढाई साल पहले लूणी गांव को 'स्मार्टÓ बनाने के लिए गोद लिया था। इसी का परिणाम है कि पूर्णत वर्षा आधारित व पारम्परिक खेती पर निर्भर गांव में जैविक खेती ने उन्नति के द्वार खोल दिए है। जैविक खेती से किसानों को अच्छी उपज ही नहीं बल्कि अच्छी आय भी मिली है। कृषि उपज में फसल पैदावार में करीब 30 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। राज्य सरकार की अन्त्योद्य योजना के तहत चयनित गांव लूणी को अगस्त 2018 में कृषि विश्वविद्यालय को गोद लेकर स्मार्ट गांव में बदलने का बीडा उठाया था। तीन वर्षीय कार्यक्रम के तहत विवि को किसानों को उन्नत तरीके से खेती के अलावा विभिन्न गतिविधियों से लाभान्वित कर लूणी को स्मार्ट गांव के रूप में विकसित किया जा रहा है।
--
उन्नत किस्मों पर कराया काम
विवि के वैज्ञानिकों की टीम ने वर्षा आधारित पारमपरिक फसलों की बजाए बाजरा, मूंग, तिल और अरण्डी की उन्नत किस्मों एमपीएमएच 17, जीएम 4, आरटी 351 व डीसीएच 519 के अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन किसानों को वितरित किए । किसानों को मांग अनुसार करीब 500 से अधिक पौधें उनके खेतों पर लगाने के लिए दिए गए। प्रधानमंत्री कृषि विकास योजना के अंतर्गत 20-20 किसानों के 25 समूह बनाकर जैविक खेती की जानकारी देकर जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया गया।
--
ये भी कार्य किए
- 150 वर्मी कम्पोस्ट इकाइयां- कृषि विभाग के सहयोग से परंपरागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत लूणी में करीब 150 किसानों के खेतों पर वर्मी कंपोस्ट इकाइयों की स्थापना कराई गई।
- उक्त योजना से लाभान्वित किसानों में से किसान खीमाराम पटेल को आत्मा योजना अंतर्गत पंचायत समिति स्तरीय कृषक पुरस्कार स्वरूप 10 हजार नकद व बेस्ट जैविक कृषक सम्मान से पुरस्कृत किया गया।
- ऑक्सीजोन पार्क- कृषि विश्वविद्यालय ने सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत लूणी में ऑक्सीजोन पार्क विकसित किया। जिसमें करीब 600 छायादार पेड़ लगाए गए।
---
लूणी गांव को स्मार्ट बनाने के लिए किए गए प्रयास रंग ला रहे है। किसानों को जैविक खेती से जोड़ा, पर्यावरण संरक्षण के लिए ऑक्सी जोन पार्क सहित कई कार्यक्रमों से किसानों को जोड़ा है। डॉ. महेन्द्रकुमार, नोडल अधिकारी