
जोधपुर.
राजस्थान हाईकोर्ट ने गुरुवार को जोधपुर में मच्छर और वायरस जनित बीमारियों के प्रकोप को लेकर सरकारी विभागों के लापरवाह रवैये पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रशासनिक काम हाथ में लेना या सुपरविजन करना कोर्ट का काम नहीं है, लेकिन जिस तरीके से जनस्वास्थ्य को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है, कोर्ट को दखल देना पड़ेगा।
वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा और न्यायाधीश विनीतकुमार माथुर की खंडपीठ में स्वप्रेरणा से दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता पंकज शर्मा ने संक्रामक रोग संस्थान को लेकर प्रगति रिपोर्ट पेश की। उन्होंने सुविधाएं एवं संसाधन जुटाने के संबंध में समय सीमा से भी कोर्ट को अवगत करवाया।
न्याय मित्र विकास बालिया ने सरकारी प्रयोगशालाओं की प्रमाणिकता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि क्वालिटी कंट्रोल के अलावा विश्वसनीयता भी बड़ा सवाल है।
खंडपीठ ने कहा कि संक्रामक रोग संस्थान को ऑपरेशनल करना एक मामला है, लेकिन व्यापक जनस्वास्थ्य की अनदेखी नहीं की जा सकती।
सुपरविजन का काम सरकार का है, यदि ऐसा करने में सरकार विफल है तो कोर्ट को मॉनिटरिंग कमेटी गठित करनी पड़ेगी। यह कमेटी नियमित आधार पर शहर की बदहाल तस्वीर कोर्ट को बताएगी, ताकि आवश्यक निर्देश दिए जा सकें।
खंडपीठ ने कहा कि साफ सफाई नहीं होने से मच्छर जनित बीमारियां फैल रही है। इस पर नियंत्रण की बजाय वास्तविक तस्वीर छिपाने की कोशिश हो रही है। मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को मुकर्रर की गई है।